सारांश
- 2014 के बाद से भारत की आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी नीति में एक निर्णायक परिवर्तन देखने को मिला है।
- प्रतिक्रियात्मक और घटना-आधारित कार्यवाही से आगे बढ़ते हुए, राष्ट्रवादी सरकार ने शून्य सहनशीलता और रोकथाम–केंद्रित रणनीति अपनाई, जिसका आधार बना—इंटेलिजेंस का एकीकरण, कानूनी सशक्तिकरण, सीमाओं की मजबूती, आतंक वित्तपोषण पर प्रहार और सतत् ऑपरेशनल दबाव।
- इस रणनीति ने न केवल आतंकी घटनाओं और हताहतों को कम किया, बल्कि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह रहा कि कई बड़े हिंसक षड्यंत्रों को उनके क्रियान्वयन से पहले ही निष्क्रिय कर दिया गया।
- दिल्ली ब्लास्ट मामला और बरेली हिंसा की योजना इसके ठोस उदाहरण हैं, जहाँ समय पर इंटेलिजेंस समन्वय और निर्णायक कार्रवाई से बड़े पैमाने पर जनहानि को रोका गया।
- यह लेख प्रमुख आतंकवाद–रोधी पहलों का विश्लेषण करता है, जिन्होंने मिलकर भारत की सुरक्षा, संरक्षा, अखंडता और संप्रभुता को मजबूत किया—और जिसका समापन जनवरी 2026 में राष्ट्रीय IED डेटा प्रबंधन प्रणाली (NIDMS) के शुभारंभ के साथ हुआ।
कैसे मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, इंटेलिजेंस एकीकरण और रोकथाम आधारित कार्रवाई ने भारत को अधिक सुरक्षित बनाया (2014–2026)
1. 2014 के बाद रणनीतिक बदलाव: प्रतिक्रिया से रोकथाम की ओर
दशकों तक भारत की आतंकवाद-रोधी नीति मुख्यतः प्रतिक्रियात्मक रही:
- हमले के बाद जांच
- इंटेलिजेंस एजेंसियों में तालमेल की कमी
- आतंक नेटवर्क का बार-बार पुनर्जीवित होना
2014 के बाद सरकार ने रोकथाम की नीति अपनाई, जिसमें शामिल था:
- खतरों का पूर्वानुमान, न कि केवल प्रतिक्रिया
- आतंकी इकोसिस्टम को शुरुआती चरण में ही तोड़ना
- आतंकवाद को अलग-अलग घटनाओं के बजाय एक संगठित तंत्र के रूप में देखना
यही रणनीतिक स्पष्टता आगे की सभी सुधारों की नींव बनी।
2. इंटेलिजेंस एकीकरण: मल्टी–एजेंसी सेंटर (MAC) का पुनर्गठन
सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक था इंटेलिजेंस का एकीकरण।
- पुनर्गठित MAC (2025) ने जिला पुलिस इकाइयों को 28 इंटेलिजेंस और प्रवर्तन एजेंसियों से जोड़ा
- AI टूल्स, GIS मैपिंग और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स से रीयल–टाइम खतरा आकलन संभव हुआ
- अनिवार्य सूचना-साझाकरण ने असंगठित समन्वय को समाप्त किया
इससे वित्तीय गड़बड़ी, डिजिटल संकेत और संदिग्ध गतिविधियों जैसे बिखरे इनपुट्स को समय रहते जोड़ा और समझा जा सका।
3. केस स्टडी: दिल्ली ब्लास्ट मामला – हमलों की श्रृंखला को रोकना
- दिल्ली ब्लास्ट मामला रोकथाम आधारित नीति की सफलता का बड़ा उदाहरण है।
क्या सही रहा:
शुरुआती मल्टी–एजेंसी इंटेलिजेंस इनपुट्स
- तेज़ फॉरेंसिक और डिजिटल विश्लेषण, जिससे व्यापक साजिश के संकेत मिले
- त्वरित गिरफ्तारियाँ और छापे, जिससे लॉजिस्टिक्स और कम्युनिकेशन नेटवर्क टूटे
- संकेत मिले कि कई स्थानों को निशाना बनाया जाना था
परिणाम:
इस घटना को अलग-थलग नहीं माना गया, बल्कि इसे एक बड़े आतंकी नेटवर्क का हिस्सा समझा गया। समय रहते कार्रवाई से पूरी साजिश जड़ से ध्वस्त हो गई।
4. केस स्टडी: बरेली हिंसा योजना – आग लगने से पहले नियंत्रण
- बरेली में एजेंसियों को बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा की योजना के संकेत मिले।
रोकथाम के कदम:
- भीड़ जुटाने, फंडिंग और भड़काऊ संदेशों पर अग्रिम सूचना
- पूर्व–निरोधात्मक पूछताछ और कानूनी हिरासत
- व्यापक पुलिस तैनाती और प्रशासनिक समन्वय
- आयोजकों और संचार चैनलों को निष्क्रिय करना
नतीजा:
भीड़, समय और अफवाह—तीनों को तोड़कर हिंसा को शुरू होने से पहले ही रोक दिया गया।
5. कानूनी सशक्तिकरण: NIA और UAPA सुधार
कानूनी सुधारों ने एजेंसियों को निर्णायक शक्ति दी:
- NIA संशोधन अधिनियम (2019) से अंतरराष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र
- साइबर आतंकवाद और संगठित अपराध को शामिल किया गया
UAPA संशोधन के तहत:
- व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित करने की शक्ति
- संपत्ति और वित्तीय संसाधनों की शीघ्र कुर्की
इससे कार्रवाई प्रतिक्रियात्मक से रोकथामात्मक बनी।
6. आतंक वित्तपोषण पर प्रहार: धन की नली काटना
आतंकवाद धन पर निर्भर करता है। 25-सूत्रीय आतंक–वित्तपोषण विरोधी योजना के तहत:
- हवाला नेटवर्क
- शेल कंपनियाँ और NGO फ्रंट
- क्रिप्टो फंडिंग
- नार्को-टेरर चैनल
FIU, ED और NIA के समन्वय से ₹16,500 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की गई।
7. सीमा सुरक्षा: एंटी–ड्रोन सिस्टम और CIBMS
सीमा पार समर्थन को तकनीक से रोका गया:
- एंटी–ड्रोन सिस्टम से UAV-आधारित हथियार और ड्रग तस्करी पर रोक
- 100 से अधिक ड्रोन निष्क्रिय किए गए
- CIBMS से स्मार्ट फेंसिंग, थर्मल इमेजर और एंटी-टनल रडार
2023 तक घुसपैठ के प्रयास ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर आ गए।
8. ज़मीनी ऑपरेशन: ऑपरेशन ऑल आउट, सिंदूर और महादेव
लगातार दबाव से आतंकी नेटवर्क को उबरने का मौका नहीं मिला:
- ऑपरेशन ऑल आउट (2017 से) – 1,000 से अधिक आतंकवादी मारे गए
- पत्थरबाज़ी और भर्ती में 90% से अधिक की गिरावट
- ऑपरेशन सिंदूर और महादेव से नेतृत्व और इन्फ्रास्ट्रक्चर ध्वस्त
9. जम्मू–कश्मीर: आतंक इकोसिस्टम का पतन
सबसे स्पष्ट असर J&K में दिखा:
- आतंकी घटनाएँ: 228 (2018) से 43 (2023)
- सुरक्षा बल शहीद: 91 से 25
- नागरिक मौतें: 55 से 13
यह गिरावट इकोसिस्टम तोड़ने का परिणाम थी।
10. NIDMS: भविष्य की रोकथाम रणनीति
राष्ट्रीय IED डेटा प्रबंधन प्रणाली (2026):
- IED घटनाओं का केंद्रीकृत डेटाबेस
- विस्फोटक पैटर्न की राज्य-स्तरीय कड़ी
- सप्लाई-चेन और कार्यप्रणाली का मैपिंग
- फील्ड यूनिट्स को पूर्व चेतावनी
डेटा अब रक्षा का हथियार बन चुका है।
रणनीति और इच्छाशक्ति से सुरक्षा
- दिल्ली और बरेली के मामले यह साबित करते हैं कि आतंकवाद–रोधी सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण वे हमले हैं जो कभी हुए ही नहीं।
2014 के बाद से:
- जन–सुरक्षा मजबूत हुई
- राष्ट्रीय अखंडता और संप्रभुता सुरक्षित हुई
- सुरक्षा संस्थानों पर जन–विश्वास बढ़ा
- भारत का संदेश स्पष्ट है:
आतंकवाद को संभाला नहीं जाएगा—उसे पहले ही पहचान कर, तोड़ कर और समाप्त किया जाएगा।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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