बंगाल और भारत के लोकतंत्र पर मंडराता ख़तरा
सीमाओं पर घुसपैठ – लोकतंत्र पर मूक हमला
पश्चिम बंगाल लंबे समय से बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या झेल रहा है। लेकिन ममता बनर्जी की सरकार में यह घुसपैठ अब सुनियोजित वोट बैंक प्रोजेक्टमें बदल गई है।
2026 विधानसभा चुनाव से पहले एक चौंकाने वाला ट्रेंड दिख रहा है – सीमावर्ती जिलों में नए वोटरों का पंजीकरण अचानक 9 गुना बढ़ गया है। यह स्वाभाविक नहीं है बल्कि राज्य की जनसांख्यिकीय और राजनीतिक संरचना को बदलने की सुनियोजित साजिश है।
मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर दिनाजपुर, कूचबिहार, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जैसे जिले इस फर्जीवाड़े के केंद्र बन चुके हैं।
फर्जी वोटरों का खेल – आयोग की चेतावनी
- जहाँ पहले हर विधानसभा क्षेत्र में करीब 100 नए वोटर जुड़ते थे, अब यह संख्या 900 तक पहुँच गई है।
- चुनाव आयोग ने हाल ही में चार अधिकारियों – देबोत्तम दत्ता चौधरी, बिप्लब सरकार, ताथागत मोंडल और सुदीप्त दास – को फर्जी आवेदन पास करने के आरोप में निलंबित कर दिया।
- डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरोजित हल्दारके खिलाफ तो सीधा FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया।
आयोग ने साफ कहा – यह लापरवाही नहीं बल्कि लोकतंत्र के साथ सीधा अपराध और साजिश है।
ममता की वोट बैंक राजनीति – खामोशी बहुत कुछ कहती है
इतने सबूतों के बावजूद ममता सरकार चुप क्यों है?
क्योंकि:
- तृणमूल कांग्रेस की राजनीति वोट बैंक पर टिकी है, जहाँ अवैध घुसपैठियों को “भविष्य का वोटर” माना जाता है।
- ममता सरकार के लिए सत्ता प्राथमिकता है, राष्ट्र नहीं।
- अवैध घुसपैठ और फर्जी वोटर रजिस्ट्रेशन पर आँखें मूँदकर बैठी सरकार, दरअसल, बंगाल को बेच रही है और देश की संप्रभुता को खरे मैं डाल रही है।
चौंकाने वाले आँकड़े – लोकतंत्र के लिए संकट
- पिछले तीन सालों में आधिकारिक जानकारी से 2,688 बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए और वापस भेजे गए। लेकिन घुसपैठियों की असली संख्या लाखों में है।
- 2024 की रिसर्च रिपोर्ट “Electoral Roll Inflation in West Bengal” के अनुसार बंगाल में करीब 1 करोड़ फर्जी वोटर हो सकते हैं।
- यह 13.69% की वोटर लिस्ट में वृद्धि है – इतना बड़ा आँकड़ा चुनाव नतीजों को पूरी तरह बदल सकता है।
इसका मतलब साफ है कि बंगाल के चुनाव अब भारतीय नागरिकों का नहीं बल्कि घुसपैठियों और उनके राजनीतिक संरक्षकों का फैसला बनते जा रहे हैं।
आगे का रास्ता – ज़रूरी है SIR और अतिरिक्त सुरक्षा
👉 SIR (Systematic Identification and Removal) – फर्जी वोटरों की सफाई
- बिहार में हाल ही में हुआ SIR अभियान साबित करता है कि यह सबसे कारगर हथियार है वोटर लिस्ट को साफ करने का।
- इससे नकली और डमी वोटरों की पहचान हुई और असली नागरिकों के वोट की रक्षा हुई।
- यही कारण है कि 2026 चुनाव से पहले हर राज्य में SIR लागू होना ज़रूरी है।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि चुनाव परिणाम भारत के असली नागरिकों का फैसला हो, न कि घुसपैठियों का।
👉 राज्य से परे अतिरिक्त सुरक्षा बल
- केवल राज्य पुलिस पर निर्भर रहना खतरनाक है।
- बंगाल की पुलिस राजनीति के अधीन है और निष्पक्ष चुनाव नहीं करा सकती।
- ऐसे में केंद्रीय सुरक्षा बल (CAPF) और विशेष चुनाव सुरक्षा बल की तैनाती ज़रूरी है।
- तभी आम वोटर बिना डर और दबाव के मतदान कर पाएगा।
अगर ये कदम न उठाए गए तो 2026 का चुनाव लोकतंत्र का मज़ाक बनकर रह जाएगा।
बड़ा खतरा – यह केवल बंगाल नहीं, पूरे भारत का प्रश्न
- यह सिर्फ बंगाल की समस्या नहीं है। अगर यह वोट बैंक मॉडलसफल होता रहा तो यह पूरे भारत में फैलकर लोकतंत्र को अस्थिर कर देगा।
- विपक्षी दल, वामपंथी विचारक, NGOs और लुटियन मीडिया – सब इसमें शामिल हैं क्योंकि इन्हें अराजकता, तुष्टिकरण और जनसंख्या खेल से फायदा मिलता है।
- इन्हें वह भारत पसंद नहीं जो मोदी जी के नेतृत्व में वैश्विक शक्ति बन रहा है। यही कारण है कि विदेशी NGOs और “डीप स्टेट” ताकतें भी इस गंदे खेल का समर्थन करती हैं।
जागो बंगाल, जागो भारत
- पश्चिम बंगाल की घुसपैठ केवल सीमा सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और भारत की आत्मा का प्रश्न है।
- ममता बनर्जी की चुप्पी और सहमति साफ दिखाती है कि उनके लिए कुर्सी भारत से बड़ी है।
👉 अब समय है हर भारतीय के खड़े होने का और माँग करने का:
- 2026 से पहले हर राज्य में SIR लागू करो
- चुनावों में केंद्रीय सुरक्षा बल की तैनाती करो
- घुसपैठ और फर्जी वोटिंग पर ज़ीरो टॉलरेंस अपनाओ
यह चुनाव नहीं, यह लड़ाई है भारतीय लोकतंत्र और सनातन भविष्य की रक्षा की।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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