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राष्ट्रीय पुनर्जागरण

भारत का निर्णायक मोड़: रणनीतिक भटकाव से राष्ट्रीय पुनर्जागरण तक

  • कई दशकों तक भारत ऐसी शासन-प्रणाली के तहत चलता रहा, जहाँ राष्ट्रीय हित की तुलना में राजनीतिक अस्तित्व को प्राथमिकता दी गई।

नीति-निर्णय में जड़ता, भ्रष्टाचार और वैचारिक हिचकिचाहट ने उन संस्थानों को कमजोर किया जिनका दायित्व देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करना था।

  • महत्वपूर्ण सुरक्षा निर्णयों में देरी या कमजोरी
  • घोटालों के कारण संस्थागत विश्वसनीयता और जनविश्वास में गिरावट
  • बुनियादी ढाँचा और विनिर्माण अपनी क्षमता से पीछे रहे
  • आंतरिक सुरक्षा प्रतिक्रियात्मक बनी रही, न कि निवारक

यह नुकसान केवल आर्थिक नहीं था—यह रणनीतिक था, जिसने भारत के आत्मविश्वास और वैश्विक प्रभाव को सीमित किया।

तुष्टिकरण की राजनीति और उसकी रणनीतिक कीमत

पूर्ववर्ती शासन में तुष्टिकरणआधारित निर्णय प्रक्रिया बार-बार देखने को मिली:

  • चरमपंथी नेटवर्क के विरुद्ध कठोर कार्रवाई से परहेज
  • कानून-व्यवस्था का असमान और कमजोर प्रवर्तन
  • आतंकवाद और सीमा-पार खतरों पर नरम या विलंबित प्रतिक्रिया
  • जवाबदेही की जगह राजनीतिक सावधानी

इस हिचकिचाहट ने प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर किया और शत्रुतापूर्ण शक्तियों को भारत की सीमाएँ परखने का अवसर दिया।

वाजपेयी सिद्धांत: उत्तरदायित्व के साथ शक्ति

एक निर्णायक सुधार श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में आया, जिन्होंने एक स्पष्ट राष्ट्रीय दृष्टि प्रस्तुत की:

  • राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं
  • शांति की नींव शक्ति है, कमजोरी नहीं
  • संप्रभुता बाहरी अनुमोदन पर निर्भर नहीं हो सकती

इस दृष्टि ने रणनीतिक स्पष्टता और राष्ट्रीय स्वाभिमान को पुनर्स्थापित किया।

2014 के बाद: हिचकिचाहट से कार्रवाई तक

2014 के बाद इस दृष्टि को नीतिगत कार्यवाही के माध्यम से सुदृढ़ किया गया:

  • बुनियादी ढाँचा: राजमार्ग, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे
  • विनिर्माण: मेक इन इंडिया, PLI योजनाएँ, रक्षा स्वदेशीकरण
  • सुरक्षा: तेज निर्णय, बेहतर खुफिया समन्वय
  • अर्थव्यवस्था: डिजिटल शासन, पारदर्शिता, स्थिरता

भारत ने स्पष्ट रूप से राष्ट्रप्रथम शासन की दिशा अपनाई।

नागरिकों की भूमिका

एक सशक्त भारत के लिए सक्रिय नागरिक आवश्यक हैं:

  • अधिक और जागरूक मतदान
  • राष्ट्रीय हित आधारित नीतियों का समर्थन
  • भ्रामक और विभाजनकारी प्रचार का अस्वीकार
  • जिम्मेदार राजनीतिक और सामाजिक सहभागिता
  • भारत का उत्थान तभी संभव है जब सुरक्षा, विकास और एकता साथ-साथ आगे बढ़ें।
  • राष्ट्रप्रथम शासन का समर्थन किसी दल का समर्थन नहीं, बल्कि भारत के भविष्य का समर्थन है—ताकि देश एक सशक्त, सुरक्षित और सम्मानित वैश्विक शक्ति बन सके।

 

🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳

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