सारांश
- यह लेख इस बात का विश्लेषण करता है कि कैसे 1947 के बाद के दशकों में कांग्रेस पार्टी की नीतियों पर ‘वोट बैंक’ और ‘विभाजनकारी’ होने के आरोप लगे, जिससे हिंदू समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हुई।
- इसके विपरीत, 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों (सनातन धर्म) को पुनः प्राप्त किया, अनुच्छेद 370 को समाप्त किया, और अर्थव्यवस्था को ‘फ्रेजाइल फाइव’ से निकालकर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी शक्ति बनाया।
- लेख इस संभावना पर भी विचार करता है कि यदि पुरानी नीतियां (जैसे सच्चर कमेटी और सांप्रदायिक हिंसा विधेयक) लागू होतीं, तो भारत की स्थिति आज पड़ोसी इस्लामी देशों जैसी अस्थिर हो सकती थी।
वैश्विक शक्ति बनने तक का सफर
1. कांग्रेस शासन (1947-2014): तुष्टिकरण और हिंदू हितों की अनदेखी
कांग्रेस के शासनकाल को अक्सर ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्षता’ के नाम पर एक विशिष्ट वर्ग को लाभ पहुँचाने के दौर के रूप में देखा जाता है। आलोचकों का तर्क है कि सत्ता बनाए रखने के लिए देश की संप्रभुता और बहुसंख्यक आबादी के हितों की बलि दी गई।
अ. न्यायिक और वैधानिक तुष्टिकरण
- शाह बानो मामला (1986): जब सर्वोच्च न्यायालय ने एक निराश्रित मुस्लिम महिला के पक्ष में फैसला सुनाया, तो राजीव गांधी सरकार ने कट्टरपंथियों के दबाव में आकर संसद के माध्यम से कानून बदल दिया। यह धर्मनिरपेक्षता के नाम पर न्यायिक गरिमा और लैंगिक न्याय की हार थी।
- वक्फ एक्ट (1995): इस कानून ने वक्फ बोर्ड को ऐसी असीमित शक्तियां दीं कि वे किसी भी निजी या सार्वजनिक संपत्ति पर दावा कर सकते हैं, जिसके विरुद्ध सामान्य अदालतों में जाना कठिन बना दिया गया। इसे ‘राज्य के भीतर राज्य’ बनाने की कोशिश माना गया।
- Places of Worship Act (1991): इस कानून के माध्यम से हिंदुओं को उनके प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थलों (जैसे काशी और मथुरा) के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने से वंचित कर दिया गया, जिससे ऐतिहासिक अन्याय को कानूनी मान्यता मिल गई।
ब. हिंदुओं का हाशिए पर जाना और ‘भगवा आतंकवाद’ का नैरेटिव
- हिंदू कोड बिल बनाम पर्सनल लॉ: जहां हिंदुओं के पारिवारिक कानूनों का आधुनिकीकरण किया गया, वहीं अल्पसंख्यकों को उनके पुराने कानूनों के तहत छोड़ दिया गया। यह ‘एक देश, दो विधान’ की स्थिति थी।
- झूठे विमर्श का निर्माण: सत्ता में बने रहने के लिए ‘हिंदू आतंकवाद’ या ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया ताकि सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान वास्तविक खतरों (सीमा पार आतंकवाद) से भटकाया जा सके और हिंदू समाज को रक्षात्मक स्थिति में लाया जा सके।
स. राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के साथ खिलवाड़
- अनुच्छेद 370 का संरक्षण: कश्मीर में अलगाववाद को दशकों तक पालने और वहां से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार एवं पलायन पर मौन रहने को कांग्रेस की सबसे बड़ी रणनीतिक विफलता माना जाता है।
- कच्छतीवू (Katchatheevu) द्वीप: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस द्वीप को श्रीलंका को सौंपना और सीमाओं पर बुनियादी ढांचे का निर्माण न करना राष्ट्रीय संप्रभुता की उपेक्षा का प्रमाण है।
2. वह भयावह परिदृश्य जो घटित हो सकता था
यदि 2014 में सत्ता परिवर्तन नहीं होता, तो कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित कुछ बिल और समितियां भारत के सामाजिक ढांचे को स्थायी रूप से नष्ट कर सकती थीं:
- सांप्रदायिक हिंसा विधेयक (Prevention of Communal Violence Bill): इस विधेयक के प्रारूप में यह निहित था कि दंगे की स्थिति में केवल बहुसंख्यक (हिंदू) ही दोषी माने जाएंगे। यदि यह कानून बनता, तो हिंदू समाज अपने ही देश में कानूनी रूप से असुरक्षित हो जाता।
- सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्रा आयोग: इन रिपोर्टों के आधार पर धर्म आधारित आरक्षण और संसाधनों का बंटवारा करने की तैयारी थी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का यह बयान कि “संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है,” इस विभाजनकारी सोच को स्पष्ट करता है।
- पाकिस्तान जैसी स्थिति: आलोचकों का मानना है कि यदि जनसंख्या असंतुलन, अवैध घुसपैठ (बांग्लादेशी/रोहिंग्या) और तुष्टिकरण जारी रहता, तो भारत भी आज पाकिस्तान या बांग्लादेश की तरह एक असफल और अस्थिर राष्ट्र बन गया होता।
3. मोदी युग (2014-वर्तमान): सनातन गौरव और राष्ट्रवाद का उदय
2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन के केंद्र में ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) और ‘सबका साथ, सबका विकास’ को रखा।
अ. सनातन धर्म और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
- राम मंदिर का निर्माण: 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी विजय है।
- दिव्य और भव्य केंद्र: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन का महाकाल लोक, और केदारनाथ-बद्रीनाथ का पुनरुद्धार हिंदू श्रद्धा केंद्रों को उनके खोए हुए गौरव के साथ वापस लाया है।
- अनुच्छेद 370 का अंत: 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को हटाकर कश्मीर को मुख्यधारा में शामिल किया गया, जिससे भारत की अखंडता सुनिश्चित हुई।
ब. आर्थिक क्रांति: ‘फ्रेजाइल फाइव’ से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
- भ्रष्टाचार पर प्रहार: DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से बिचौलियों को खत्म किया गया, जिससे लाखों करोड़ रुपये की लूट रुकी।
- दुनिया की विकास दर का नेतृत्व: भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘पीएलआई’ योजनाओं ने भारत को वैश्विक विनिर्माण (Manufacturing) का केंद्र बनाया है।
- डिजिटल इंडिया: UPI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भारत आज अमेरिका और यूरोप से भी आगे निकल चुका है।
स. सैन्य शक्ति और रणनीतिक स्वायत्तता
- आतंकवाद पर कड़ा प्रहार: उरी की सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक ने पाकिस्तान के ‘परमाणु ब्लैकमेल’ को खत्म कर दिया। अब भारत ‘घर में घुसकर मारता है’।
- रक्षा निर्यात: भारत अब केवल हथियार खरीदता नहीं है, बल्कि ‘ब्रह्मोस’ जैसी मिसाइलें दुनिया को बेच रहा है। भारतीय सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में से एक (चौथी सबसे बड़ी) बन चुकी है।
4. एक निर्णायक ऐतिहासिक परिवर्तन
पिछले दस वर्षों में भारत ने यह सिद्ध किया है कि विकास और विरासत (Development and Heritage) साथ-साथ चल सकते हैं।
- जहाँ कांग्रेस के शासनकाल में हिंदू समाज को ‘दोयम दर्जे का नागरिक’ बनाने और देश को आर्थिक रूप से खोखला करने के प्रयास किए गए, वहीं मोदी सरकार ने भारत को एक ‘विश्वशक्ति’ के रूप में स्थापित किया है।
आज का भारत अपनी सीमाओं पर अडिग है, अपनी संस्कृति पर गर्व करता है और अपनी अर्थव्यवस्था के दम पर दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। यह केवल एक सरकार का परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का पुनरुत्थान है।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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