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भारत का सभ्यतागत पुनर्जागरण

भारत का सभ्यतागत पुनर्जागरण

अयोध्या से काशी, मथुरा तक सत्य, इतिहास और धर्म का पुनर्स्थापन

🔱 1. मूल ऐतिहासिक तथ्य: जब इस्लाम नहीं था, तब मस्जिद कैसे?

  • 1500 वर्ष पूर्व भारत में इस्लाम नाम मात्र भी नहीं था।
  • इसलिए न मस्जिदें थीं, न इस्लामी स्थापत्य, न शिलालेख।
  • उस समय भारत पूर्णतः वैदिकसनातनबौद्धजैन सभ्यता का केंद्र था।
  • प्रश्न यह नहीं है कि आज मस्जिद हैं या नहीं — प्रश्न यह है कि वे वहां आई कैसे?
  • और उत्तर इतना ही स्पष्ट है: आक्रमण, विध्वंस और पुनर्निर्माण।

🔥 2. विदेशी आक्रमणकारी और मंदिर विध्वंस की सुनियोजित नीति

  • बाबर, गजनवी, गौरी, खिज़र, औरंगज़ेब आदि ने केवल युद्ध नहीं, सभ्यतागत दमन का अभियान चलाया।
  • मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाना कोई धार्मिक आवश्यकता नहीं थी —
    यह वर्चस्व और दमन का राजनीतिक प्रदर्शन था।
  • इसकी पुष्टि स्वयं इस्लामी इतिहासकारों, तवारीख़, बाबरनामा, फतहनामा और गजेट रिकॉर्ड्स से होती है।

लक्ष्य यह था:

  • आस्था की जड़ काटो
  • सभ्यता की स्मृति मिटाओ
  • स्वाभिमान कुचलो
  • शासन आसान बनाओ

⚖️ 3. 70 वर्षों का चुप्पा षड्यंत्र: इतिहास दबाया गया, सत्य रोका गया

  • आज़ादी के बाद 70 वर्षों तक भारत का शासन तुष्टिकरण आधारित वोटबैंक मॉडल पर चला।
  • कांग्रेस ने मंदिर–मस्जिद विवादों को “स्थायी समस्या” बनाकर रखा।
  • न सुनवाई की गति बढ़ने दी, न साक्ष्य स्वीकार किए।

उद्देश्‍य स्पष्ट था:

  • एक तरफ हिंदुओं को विभाजित रखो
  • दूसरी तरफ मुसलमानों को संगठित वोटबैंक रखो
  • राजनीति को सुरक्षित और स्थायी बनाओ

इसके परिणाम:

  • न्याय विलंबित
  • सभ्यता अपमानित
  • आस्था उपेक्षित

🛕 4. 2014 के बाद प्रत्यक्ष परिवर्तन: सत्य को गति मिली

  • 2014 के बाद भारत में पहली बार इतिहास और न्याय एक साथ आगे चले।

अयोध्या का फैसला:

  • भावनाओं से नहीं, पुरातत्व, कार्बन डेटिंग और उत्खनन के प्रमाणों से।

काशी का सर्वेक्षण:

  • 300+ मूर्तियाँ, गर्भगृह रचना, शिवलिंग अवशेष, शिलालेख, पश्चिमी दीवार।

मथुरा:

  • न्यायालय ने साक्ष्य सुनवाई शुरू की, जो दशकों तक रोक रखी थी।

अब सत्य अदालत में अभियुक्त नहीं, बल्कि साक्ष्य बनकर उपस्थित है।

🌍 5. यह संघर्ष किसी धर्म से नहीं, असत्य नैरेटिव से है

  • भारत किसी समुदाय से लड़ नहीं रहा।
  • भारत किसी पूजा अधिकार को छीन नहीं रहा।
  • भारत केवल धार्मिक इतिहास को पुनः प्रतिष्ठित कर रहा है।
  • ज्ञानवापी, मथुरा और अयोध्या का संघर्ष हिन्दूमुस्लिम नहीं, सभ्यतासत्य बनाम राजनीतिकतुष्टिकरण है।

🕯️ 6. सनातन धर्म का पुनर्जागरण

  • आज सनातन केवल जगा नहीं — सम्मानित हो रहा है।
  • राम मंदिर ने सभ्यता का आत्मगौरव लौटाया।
  • काशी में ASI की रिपोर्ट ने सत्य को प्रमाणित किया।
  • मथुरा आने वाले वर्षों में अगला ऐतिहासिक मुकाम बनने वाली है।

पाठ्यपुस्तकें संशोधित हो रही हैं, जहाँ अब:

  • आक्रमणकारियों को “महान” नहीं कहा जाएगा
  • मंदिर ध्वंस को “शासन परिवर्तन” नहीं कहा जाएगा
  • औरंगज़ेब को “लोकप्रिय शासक” नहीं कहा जाएगा
  • हमारे योद्धाओं को और स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के बलिदान को सम्मान मिलेगा।

🛑 7. भारत अब माफी नहीं मांग रहा, इतिहास माँग रहा है

70 वर्षों तक हमें बताया गया:

  • मंदिर ध्वंस पर बात मत करो
  • आक्रमणकारियों को दोष मत दो
  • अपनी पहचान को निजी मामला मानो

पर अब भ्रम टूट रहा है—

  • भारतीय अपनी आस्था पर डरकर नहीं, गर्व से खड़े हैं।

🌸 8. विश्व के लिए भारत का नेतृत्व पुनः आकार ले रहा है

आज जब:

  • यूरोप धार्मिक टकराव से जूझ रहा
  • अमेरिका नस्ली विभाजन से
  • मध्य–पूर्व कट्टरता से

तब भारत कह रहा है:

  • धर्म नहीं, धर्मत्व समाधान है।

सनातन धर्म —

  • किसी का विनाश नहीं चाहता,
  • किसी की भूमि नहीं चाहता,
  • किसी पर धर्म थोपना नहीं चाहता।

वह केवल सत्य के साथ खड़ा रहना चाहता है।

🌺 9. सभ्यता का चक्र पूर्ण

  • 1500 वर्षों के संघर्ष
  • 70 वर्षों की राजनीतिक चुप्पी
  • 11 वर्षों का पुनर्जागरण
  • और अब सत्य सिंहासन पर पुनः स्थापित है।

यह किसी की हार नहीं, किसी की जीत नहीं, यह भारत की आत्मा का पुनर्जन्म है।

❗ कोई उन्माद नहीं, कोई प्रतिशोध नहीं

  • पूजा जहाँ थी, वहाँ फिर होगी।
  • श्रद्धा जहाँ दबाई गई, वहाँ फिर खिलेगी।
  • सत्य जहाँ रोका गया, वहाँ फिर बोलेगा।

यह समय न्याय का है, न कि युद्ध का।

🇮🇳जय भारत, वन्देमातरम 🇮

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