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भारत की Gen Z

भारत की Gen Z: जड़ों, आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति की ओर एक सकारात्मक बदलाव

भारत की Gen Z

भारत की Gen Z में एक स्पष्ट और उत्साहजनक बदलाव दिख रहा है। पहले यह माना जाता था कि युवा पीढ़ी स्वतः ही वामपंथी-उदारवादी और परंपरा-विरोधी नैरेटिव की ओर झुक जाएगी, लेकिन आज एक बढ़ता हुआ वर्ग अपनी सांस्कृतिक जड़ों से फिर से जुड़ रहा है और आत्मविश्वास के साथ राष्ट्रभक्ति व्यक्त कर रहा है

  • यह बदलाव स्वाभाविक, अनुभवआधारित और स्वेच्छिक है—थोपा हुआ नहीं।

1️⃣ यह बदलाव क्यों हो रहा है

कई कारण हैं जिनसे Gen Z एकतरफा वैचारिक नैरेटिव को अस्वीकार कर रही है:

  • नैरेटिव से थकान: “भारत असफल है” जैसे निरंतर संदेश ज़मीनी सच्चाई से मेल नहीं खाते
  • गेटकीपिंग का अंत: पॉडकास्ट, लॉन्ग-फॉर्म कंटेंट, इंडिक स्कॉलर्स और वैकल्पिक क्रिएटर्स ने एकाधिकार तोड़ा
  • परिणामों की समझ: अवसंरचना, स्टार्टअप्स, डिजिटल समावेशन और वैश्विक पहचान साफ़ दिखती है
  • स्वाभाविक संदेह: NGO रिपोर्ट्स, एलीट मीडिया फ्रेमिंग और विदेशी मान्यता को बिना सवाल स्वीकार नहीं किया जाता

Gen Z आधुनिकता-विरोधी नहीं—वह ब्रेनवॉशविरोधी है।

2️⃣ जड़ों से पुनः जुड़ाव

कैम्पस, शहरों और ऑनलाइन स्पेस में दिख रहे संकेत:

  • मंदिर उत्सवों, यात्राओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़ती भागीदारी
  • सनातन धर्म, भगवद्गीता, वेदांत और इंडिक दर्शन में बढ़ती रुचि
  • मानसिक-शारीरिक संतुलन के लिए योग, ध्यान और आयुर्वेद का अपनाना
  • इस धारणा का खंडन कि परंपरा = पिछड़ापन
  • अंतरिक्ष, तकनीक और वैश्विक कूटनीति में भारत की उपलब्धियों पर गर्व

यह जुड़ाव सांस्कृतिक, खोजपरक और स्वयंचयनित है।

3️⃣ भजन सभाएँ और आध्यात्मिक समुदाय

एक महत्वपूर्ण संकेत है Gen Z द्वारा संचालित भजन और आध्यात्मिक आयोजनों का बढ़ना:

  • युवाओं द्वारा आयोजित, अनौपचारिक और समावेशी
  • शराब-मुक्त, समुदाय-केंद्रित विकल्प
  • शांति, जुड़ाव और अर्थ पर केंद्रित—डोग्मा नहीं

Gen Z आध्यात्मिकता से दूर नहीं जा रही—वह उसे अपने तरीके से अपना रही है

4️⃣ बिना माफी की राष्ट्रभक्ति

इस पीढ़ी में आत्मविश्वासी, गैरआक्रामक राष्ट्रभक्ति दिखती है:

  • संप्रभुता और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान
  • राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीरता से लेना
  • भारत की स्वतंत्र वैश्विक आवाज़ पर गर्व
  • भारतीय या हिंदू पहचान को शर्मिंदा करने वाले नैरेटिव का अस्वीकार

5️⃣ वास्तविकता की जाँच

यह बदलाव वास्तविक लेकिन असमान है। कुछ एलीट स्पेस में वाम-उदार प्रभाव बना हुआ है, पर Gen Z अब वैचारिक रूप से बंधक नहीं है।

भारत की Gen Z तेज़ी से अपनी जड़ों से जुड़ रही है, वामपंथी और राष्ट्रविरोधी/हिंदूविरोधी प्रचार को अस्वीकार कर रही है, और आधुनिक महत्वाकांक्षा के साथ सांस्कृतिक आत्मविश्वास अपना रही है।

  • भविष्य प्रचार का नहीं—सत्य, गरिमा और आत्मसम्मान का है।

🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳

पुराने लेख: https://saveindia108.in/our-blog/

अरट्टई: https://tinyurl.com/mrhvj9vs

वेबसाईट :https://www.saveindia108.in

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