बलिदान, मूल्यों और सभ्यतागत स्मृति को समर्पित एक सनातनी श्रद्धांजलि 🚩
1. एक मौन प्रश्न, जो हमें स्वयं से पूछना चाहिए
- समय के साथ यह सामान्य होता जा रहा है कि अनेक हिंदू परिवार क्रिसमस को कई ईसाई परिवारों से भी अधिक उत्साह से मनाने लगे हैं।
- सजावट, सांता की कहानियाँ, केक, उपहार और “मेरी क्रिसमस” — सब कुछ बिना सोचे-समझे हमारे घरों में प्रवेश कर चुका है।
ऊपरी तौर पर यह निर्दोष लगता है, पर इसके भीतर एक गहरा सभ्यतागत प्रश्न छिपा है:
- क्या हम वास्तव में अपने बच्चों को खुशी दे रहे हैं?
- या चुपचाप उन्हें उनकी पहचान भूलने दे रहे हैं?
- क्या हम उनकी सोच समृद्ध कर रहे हैं या उनकी सांस्कृतिक स्मृति को धीरे-धीरे मिटा रहे हैं?
त्योहार केवल उत्सव नहीं होते — वे कल्पना, स्मृति और पहचान का निर्माण करते हैं।
2. 25 दिसंबर और सनातन धर्म: तुलसी विवाह, न कि सांस्कृतिक विस्मृति
आज बहुत कम हिंदू परिवार जानते हैं कि 25 दिसंबर सनातन धर्म में तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है।
तुलसी विवाह का अर्थ है:
- पवित्रता और भक्ति
- प्रकृति और दिव्यता का संतुलन
- विवाह को धर्म के रूप में स्वीकार करना
- स्त्री और पर्यावरण शक्ति का सम्मान
जब हम बच्चों को तुलसी माता और विष्णु–शालिग्राम विवाह के बारे में बताते हैं, तो हम उन्हें देते हैं:
- सांस्कृतिक आत्मविश्वास
- आध्यात्मिक आधार
- पूर्वजों से जुड़ाव की अनुभूति
यदि हम अपने बच्चों को यह नहीं बताएँगे कि 25 दिसंबर हमारे लिए क्या है, तो कोई और उसका अर्थ तय कर देगा।
3. शहादत सप्ताह: धर्म और स्वतंत्रता की कीमत
दिसंबर का अंतिम सप्ताह केवल उत्सव का नहीं, बल्कि शहादत सप्ताह भी है — बलिदान से सना हुआ समय।
सिख गुरुओं का अद्वितीय त्याग
- गुरु तेग बहादुर जी ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा हेतु प्राण त्याग दिए — केवल सिखों के लिए नहीं, पूरे भारत के लिए।
- गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों को धर्म न छोड़ने के कारण दीवार में चुनवा दिया गया।
सनातनी राजा और योद्धा
- महाराणा प्रताप — जिन्होंने आत्मसम्मान के लिए कष्ट स्वीकार किया
- छत्रपति शिवाजी महाराज — धर्म और स्वराज्य के रक्षक
- रानी दुर्गावती, राजा सुहेलदेव, लाचित बोरफुकन
- बिरसा मुंडा जैसे जनजातीय नायक, जिन्होंने अंग्रेजों और सांस्कृतिक विनाश दोनों का विरोध किया
ये कोई कथाएँ नहीं थीं —ये भारत के वास्तविक रक्षक थे, जिनकी कहानियाँ आज पाठ्यपुस्तकों से गायब हैं।
4. एक कड़वी सच्चाई: 70 वर्षों की शैक्षिक उपेक्षा और इतिहास का विकृतिकरण
हमें यह स्वीकार करना होगा कि:
- स्वतंत्रता के बाद लगभग सात दशकों तक शिक्षा प्रणाली में सनातन धर्म की उपेक्षा की गई और भारतीय इतिहास को विकृत किया गया।
क्या किया गया?
- सनातन धर्म को पाठ्यक्रम से बाहर रखा गया
- मुस्लिम आक्रमणकारियों का महिमामंडन किया गया
देश की रक्षा करने वाले सनातनी राजाओं को:
- या तो हाशिये पर डाल दिया गया
- या पूरी तरह भुला दिया गया
स्वतंत्रता संग्राम को चुनिंदा दृष्टि से पढ़ाया गया
परिणामस्वरूप , हिंदू बच्चों में:
- गर्व के स्थान पर हीनभाव
- मंदिरों और परंपराओं से दूरी
अपनी जड़ों से कटावयह सब अनजाने में नहीं हुआ — यह औपनिवेशिक मानसिकता की निरंतरता थी।
5. मैकाले की छाया और जड़ों से विच्छेद
अंग्रेज़ समझते थे:
- जब तक सनातन चेतना जीवित है, भारत को गुलाम नहीं बनाया जा सकता।
इसलिए उन्होंने:
- गुरुकुल नष्ट किए गए
- भारतीय ज्ञान और संस्कृति को पिछड़ा कहा गया
- पश्चिमी संस्कृति को श्रेष्ठ बताया गया
दुर्भाग्यवश, आज़ादी के बाद भी वही सोच जारी रही।
6. जनजातीय समाज, धर्मांतरण और आर्थिक शोषण
आज भी:
- जनजातीय क्षेत्रों में जबरन या प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण हो रहा है
- गरीबी को हथियार बनाया जा रहा है
- विदेशी फंडिंग इसका आधार है
समाधान:
- आर्थिक सशक्तिकरण
- शिक्षा में संस्कृति
- बिरसा मुंडा जैसे नायकों की पुनर्स्थापना
धर्म केवल उपदेश से नहीं — सम्मान और अवसर से जीवित रहता है।
7. बच्चों के लिए यह क्यों आवश्यक है
बच्चों की पहचान बनती है:
- कहानियों से
- त्योहारों से
- आदर्शों से
यदि हम नहीं सिखाएँगे:
- तुलसी विवाह
- शहादत सप्ताह
- सनातनी वीरों की गाथाएँ
तो कोई और उनकी सोच गढ़ेगा।
8. संतुलित मार्ग
यह किसी धर्म के विरोध की बात नहीं है।
यह बात है:
- अंधानुकरण रोकने की
- आत्मगौरव पुनर्स्थापित करने की
- सत्यपूर्ण इतिहास पढ़ाने की
हम दूसरों का सम्मान करते हुए अपने अस्तित्व को नहीं खो सकते।
9. संस्कृति ही सबसे बड़ा उत्तराधिकार है
हमारे पूर्वजों ने:
- आक्रमणों से देश बचाया
- अंग्रेजों से स्वतंत्रता दिलाई
- धर्म की रक्षा की
अब हमारा कर्तव्य है:
- उन्हें स्मरण करना
- बच्चों को सत्य सिखाना
- अपने त्योहार गर्व से मनाना
👉 25 दिसंबर को तुलसी माता के लिए दीप जलाइए
👉 शहादत सप्ताह में बलिदानियों को स्मरण कीजिए
👉 और बच्चों को सबसे बड़ा उपहार दीजिए — पहचान
क्योंकि:
- जो राष्ट्र अपनी जड़ों को भूलता है, वह स्वयं को खो देता है और इतिहास बन जाता है।
🚩 निर्णय हमारा है।
🇮🇳जय भारत, वन्देमातरम 🇮
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