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कांग्रेस बेनक़ाब

कांग्रेस बेनक़ाब: ऐतिहासिक गद्दारियों से लेकर म्यांमार के “वोट चोरी” डॉक्यूमेंट तक

🔎 भूमिका: भारतीय लोकतंत्र का असली ख़तरा

  • हर महान राष्ट्र को बाहरी दुश्मनों से जितना सतर्क रहना पड़ता है, उतना ही आंतरिक गद्दारों से भी। भारत के लिए सबसे बड़ा ख़तरा सिर्फ़ पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद या चीन की विस्तारवादी नीति से नहीं, बल्कि उस राजनीतिक पार्टी से है जिसने बार-बार भारत के ख़िलाफ़ ताक़तों के साथ हाथ मिलाया है—कांग्रेस पार्टी।
  • राहुल गांधी का तथाकथित “वोट चोरी” सबूत, जो अब म्यांमार में तैयार हुआ डॉक्यूमेंट साबित हुआ है, महज़ एक गलती नहीं बल्कि विदेशी ताक़तों से मिलीभगत का ताज़ा सबूतहै। यह उसी लंबे पैटर्न का हिस्सा है, जहाँ कांग्रेस ने हमेशा अपना और अपने परिवार का फ़ायदा भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और जनता की भलाई से ऊपर रखा है।

🗓️ म्यांमार डॉक्यूमेंट: विदेशी हाथ का प्रमाण

  • 7 अगस्त 2024: राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके “वोट चोरी” डॉक्यूमेंट पेश किया और वेबसाइट पर डाला।
  • डॉक्यूमेंट अंग्रेज़ी, हिंदी और कन्नड़ भाषा में जारी हुआ।
  • 10 सितंबर 2024: ट्विटर/X हैंडल ‘खुर्पेन्च’ ने मेटाडेटा जाँच कर यह खुलासा किया कि फाइलें Myanmar Standard Time (UTC +6:30) पर बनीं, न कि भारतीय समय पर।
  • यानी यह “सबूत” भारत में नहीं बल्कि विदेशी धरती पर तैयार हुआ।
  • जब सवाल उठे, तो कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि यह “सॉफ्टवेयर बग” या “एडोबी गड़बड़ी” है।


👉 लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों ने साफ कर दिया कि ऐसा कोई बग कभी था ही नहीं।

  • यानी यह ग़लती नहीं बल्कि सोची-समझी रणनीति थी।

🌐 कांग्रेस और उसका विदेशी एजेंडा

म्यांमार डॉक्यूमेंट कोई अकेली घटना नहीं है। कांग्रेस के इतिहास और वर्तमान दोनों से साफ होता है कि उसका चरित्र हमेशा विदेशी ताक़तों पर निर्भरऔर भारत-विरोधी एजेंडों से जुड़ा रहा है।

  • चीन कनेक्शन: कांग्रेस ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से गुप्त MOU साइन किया, जिसका सच आज तक छुपा है।
  • बिना जानकारी विदेश यात्राएँ: राहुल गांधी अक्सर अचानक विदेश चले जाते हैं, पर जनता को कुछ नहीं बताया जाता।
  • एंटी-इंडिया फ़ोरम में मौजूदगी: कांग्रेस नेताओं ने कई बार ऐसे मंचों पर भाषण दिया जहाँ भारत की छवि खराब की गई।
  • आतंकियों और कट्टरपंथियों का बचाव:कांग्रेस और उसके NGO नेटवर्क ने आतंकियों को कोर्ट में बचाने की कोशिशें कीं, कड़े क़ानूनों का विरोध किया।
  • विदेशी सोशल मीडिया बॉट्स: कांग्रेस की कैंपेनिंग में इंडोनेशिया, कज़ाखस्तान और रूस से बॉट्स के इस्तेमाल के सबूत मिले।

👉 यह सब साबित करता है कि कांग्रेस की प्राथमिकता भारत नहीं बल्कि विदेशी ताक़तें और दुश्मनों से मिलीभगत है।

💰 कांग्रेस का गद्दारी और घोटालों का इतिहास

कांग्रेस की गद्दारियाँ और भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है।

  • बोफोर्स घोटाला: रक्षा सौदे में कमीशनखोरी, जिससे भारत की सुरक्षा से खिलवाड़ हुआ।
  • 2G स्पेक्ट्रम घोटाला: ₹1.76 लाख करोड़ का नुकसान।
  • कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला: हज़ारों करोड़ की लूट और भारत की बदनामी।
  • अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाला: विदेशी रक्षा कंपनियों से रिश्वत।

हर घोटाले में दो चीज़ें कॉमन थीं:

  • विदेशी कंपनियाँ।
  • कांग्रेस नेताओं का लालच।

⚠️ कांग्रेस की मौजूदा रणनीति: भारत को भीतर से कमज़ोर करना

म्यांमार वाला प्रकरण बताता है कि कांग्रेस आज भी उसी रास्ते पर चल रही है।

  • बार-बार EVM और चुनाव आयोग पर सवाल उठाना।
  • “वोट चोरी” जैसे नारे लगाकर जनता को गुमराह करना।
  • विदेशी NGOs और वामपंथियों के साथ मिलकर देश में अस्थिरता पैदा करना (उदा. शाहीन बाग, किसान आंदोलन)।
  • विदेशों में भारत की छवि खराब करने वाले बयान देना।

👉 असल मक़सद साफ है—भारत को अस्थिर करना और सत्ता हथियाना।

❌ क्यों भारतवासियों को कांग्रेस को हमेशा के लिए नकार देना चाहिए

अब यह बिल्कुल साफ है कि:

  • जो पार्टी चीन और पाकिस्तान से दोस्ती करे, उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
  • जो पार्टी म्यांमार जैसे देशों में “वोट चोरी” डॉक्यूमेंट बनवाए, उसे सत्ता नहीं सौंपी जा सकती।
  • जो पार्टी इतिहास में हर बड़े घोटाले और विश्वासघात में शामिल रही हो, वह कभी जनता का भला नहीं कर सकती।

👉 हर भारतीय को निश्चय करना होगा:

  • कांग्रेस और उसके गठबंधन को वोट न दें।
  • राज्यों से कांग्रेस सरकारों को उखाड़ फेंकें।
  • उन नेताओं को हमेशा अस्वीकार करें जो भारत-विरोधी एजेंडा चलाते हैं।

🏛️ अगर कांग्रेस फिर सत्ता में आती तो…

  • चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा टूट जाएगा।
  • विकास रुक जाएगा और 1970-80 के भ्रष्टाचार वाले युग में लौटेंगे।
  • कट्टरपंथी ताक़तें और तुष्टिकरण बढ़ेगा।
  • विदेशी ताक़तों के इशारे पर भारत की नीतियाँ तय होंगी।

यानी कांग्रेस का सत्ता में लौटना भारत को पीछे धकेलना है।

✍️ अब भारत को सतर्क रहना होगा

राहुल गांधी का म्यांमार वाला “वोट चोरी” डॉक्यूमेंट महज़ एक PDF नहीं, बल्कि कांग्रेस की गद्दारी, विदेशी मिलीभगत और भारत-विरोधी सोच का सबूत है।

बोफोर्स से लेकर 2G, अगस्ता से लेकर म्यांमार तक, कांग्रेस ने बार-बार दिखाया है कि उसके लिए:

  • सत्ता > जनता
  • विदेशी मदद > भारत का हित
  • निजी लाभ > भारत की संप्रभुता

भारत की जनता अब पहले से कहीं ज़्यादा जागरूक है। यह समय है कि कांग्रेस को हमेशा के लिए नकार कर भारत के लोकतंत्र, संस्कृति और संप्रभुता को सुरक्षित किया जाए।

🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳

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