धर्म बनाम अधर्म
धर्म बनाम अधर्म — सनातन धर्म का शाश्वत युद्ध” सत्य और असत्य, न्याय और अन्याय के बीच निरंतर चलने वाला संघर्ष है। यह केवल बाहरी नहीं, बल्कि हमारे भीतर के विचारों और आचरण में भी विद्यमान है।
1️⃣ सनातन धर्म का शाश्वत सत्य
भारत का इतिहास गवाह है कि जब भी अधर्म ने अपने पैर पसारे हैं, जब भी दानव शक्तियों ने निरपराधों पर अत्याचार किया है और जब भी धर्म की रक्षा संकट में आई है — तब धर्मयुद्ध अनिवार्य हो गया है।
👉 संवाद, विनती, समझौते और सहनशीलता की सीमाएँ होती हैं।
👉 लेकिन जब अधर्म अपने चरम पर पहुँच जाता है, तब उसे मिटाना ही धर्म का कर्तव्य बन जाता है।
2️⃣ त्रेता और द्वापर युग की शिक्षाएँ
त्रेता युग में:
- श्रीराम ने 14 वर्षों तक वनवास सहा। वे केवल अपने पिता के वचनों का पालन नहीं कर रहे थे, बल्कि धैर्य और संयम का आदर्श भी प्रस्तुत कर रहे थे।
- लेकिन जब रावण ने माता सीता का हरण करके धर्म की मर्यादा भंग की, तो भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई की और रावण का अंत किया।
📖 संदेश: अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली हो, धर्म की विजय निश्चित है।
द्वापर युग में:
- पांडवों ने 13 वर्ष का वनवास सहा और श्रीकृष्ण ने अनेक बार शांति का संदेश लेकर कौरव दरबार में प्रवेश किया। लेकिन दुर्योधन ने कहा — “सुई की नोक के बराबर भूमि भी नहीं दूँगा।”
- तब धर्मयुद्ध अनिवार्य हो गया। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में केवल 18 दिनों में अधर्म का अंत हुआ और धर्म की पुनर्स्थापना हुई।
📖 संदेश: अधर्म के साथ संवाद और दया करना मूर्खता है। उसका अंत केवल युद्ध से ही संभव है।
3️⃣ कलियुग का वर्तमान अधर्म
आज का युग भी अलग नहीं है। अधर्म ने नए रूप धारण किए हैं:
- कांग्रेस और उसका ठगबंधन:
पिछले 70 वर्षों से कांग्रेस ने केवल मुस्लिम तुष्टिकरण, वोट-बैंक की राजनीति और भ्रष्टाचार के सहारे देश पर राज किया। हिंदुओं के साथ भेदभाव, मंदिरों पर नियंत्रण और सनातन संस्कृति को तोड़ना उनका एजेंडा रहा है। - इस्लामी कट्टरपंथ और पाकिस्तान:
लव-जिहाद, जनसंख्या-जिहाद, शरणार्थी-जिहाद (रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठ), और आतंकवाद — इन सबका एक ही लक्ष्य है: भारत को अस्थिर करना और धीरे-धीरे इसे इस्लामी राष्ट्र में बदलना। - नकली सेक्युलर और वामपंथी गैंग:
ये तथाकथित बुद्धिजीवी हमेशा आतंकियों, अलगाववादियों और पाकिस्तान का समर्थन करते हैं। हिंदुओं की हत्या और मंदिरों के अपमान पर ये मौन रहते हैं, लेकिन आतंकियों के लिए आंसू बहाते हैं। - विदेशी शक्तियाँ (अमेरिका और पश्चिम):
ये भारत को आत्मनिर्भर नहीं देखना चाहते। कृषि, रक्षा और व्यापार में दबाव डालकर भारत को आर्थिक रूप से गुलाम बनाना उनका लक्ष्य है।
👉 यही आज के रावण और दुर्योधन हैं। और इतिहास की तरह इनका अंत भी निश्चित है।
4️⃣ हिन्दुओं और देशभक्तों का कर्तव्य
आज हमें यह मानना होगा कि यह लड़ाई केवल चुनावी राजनीति की नहीं है।
यह लड़ाई है — अस्तित्व, संस्कृति और धर्म की रक्षा की।
- हमें जाति, पंथ और क्षेत्रीय भेदभाव मिटाकर एकजुट होना होगा।
- हमें मानसिक, आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से इस महायुद्ध के लिए तैयार होना होगा।
- हमें सोशल मीडिया और प्रोपेगैंडा के युद्ध में सच को सामने लाना होगा।
- हमें आने वाली पीढ़ियों को सनातन मूल्यों और संस्कृति से जोड़ना होगा।
हमें यह स्वीकार करना होगा कि कांग्रेस और उसका ठगबंधन कभी भी देशभक्त नहीं हो सकता।
5️⃣ अधर्म पर दया = हिन्दुओं और देशभक्तों पर क्रूरता
इतिहास हमें यही सिखाता है:
- रावण और दुर्योधन पर दया नहीं की गई, उनका संहार हुआ।
- मुग़ल और अंग्रेज़ दया से नहीं गए, उन्हें युद्ध से बाहर निकाला गया।
- पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हुए अत्याचार दया और समझौते का परिणाम हैं।
👉 यदि आज हमने अधर्म पर दया की, तो कल हमारी संतानें वही नरसंहार झेलेंगी।
6️⃣ आज की रणभूमि
- कांग्रेस और ठगबंधन भारत को फिर से गुलाम बनाना चाहते हैं।
- जिहादी ताक़तें भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाना चाहती हैं।
- विदेशी शक्तियाँ भारत की अर्थव्यवस्था पर कब्ज़ा करना चाहती हैं।
👉 इनके खिलाफ निर्णायक राष्ट्रीय धर्मयुद्ध ही एकमात्र उपाय है।
👉 यही “कांग्रेस मुक्त भारत” और “इस्लामीकरण मुक्त भारत“ का संकल्प है।
7️⃣ अंतिम संदेश — धर्म की विजय निश्चित है
- हर युग में अंततः धर्म की विजय हुई है।
- त्रेता में भगवान राम ने रावण का वध किया।
- द्वापर में श्रीकृष्ण ने धर्मयुद्ध कराया।
- और कलियुग में हर हिन्दू और हर देशभक्त को उठना होगा।
- हमें भी अपना धर्मयुद्ध लड़ना होगा और अपनी एकता और ताकत से अधर्म का नाश करना होगा।
🚩 हमारा लक्ष्य केवल शासन परिवर्तन नहीं है, बल्कि सनातन धर्म और भारत की आत्मा की रक्षा करना है।
👉 युद्ध अपरिहार्य है और विजय निश्चित है।
🇮🇳जय भारत, वन्देमातरम 🇮
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