🔎 सारांश
- ग्रेट निकोबार परियोजना ₹92,000 करोड़ का बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन है जो भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक बढ़त दिलाने की क्षमता रखता है।
- यह परियोजना मलक्का जलडमरूमध्य के निकट भारत की निर्णायक उपस्थिति सुनिश्चित करेगी, विदेशी ट्रांसशिपमेंट निर्भरता समाप्त करेगी, चीन की समुद्री घेराबंदी का संतुलन बनाएगी और दीर्घकालिक आर्थिक अवसर उत्पन्न करेगी।
- समर्थकों के अनुसार, यह वर्तमान राष्ट्रवादी नेतृत्व की दीर्घकालिक दृष्टि, रणनीतिक स्पष्टता और दृढ़ संकल्प का उदाहरण है, जो पूर्ववर्ती दशकों की नीति-शिथिलता से अलग है
भारत का समुद्री पुनर्जागरण: ग्रेट निकोबार से वैश्विक सामरिक शक्ति तक
🌏 1️⃣ भू-राजनीतिक स्थिति: हिंद महासागर का सामरिक केंद्र
ग्रेट निकोबार द्वीप
- भारत का सबसे दक्षिणी द्वीप
- इंडो-पैसिफिक समुद्री मार्गों के संगम के निकट
- सामरिक निगरानी और समुद्री नियंत्रण के लिए आदर्श स्थिति
यह केवल एक द्वीप नहीं, बल्कि हिंद महासागर में भारत की अग्रिम चौकी है।
🌊 2️⃣ मलक्का जलडमरूमध्य: वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा
मलक्का जलडमरूमध्य
- विश्व के 30–40% समुद्री व्यापार का मार्ग
- पूर्वी एशिया से यूरोप तक मुख्य कंटेनर रूट
- वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण गलियारा
ग्रेट निकोबार यहाँ से लगभग 900 किमी दूर है। अर्थात भारत अब समुद्री चौकसी प्वाइंट की राजनीति में निर्णायक भागीदार बनेगा।
⚓ 3️⃣ ट्रांसशिपमेंट स्वतंत्रता: विदेशी निर्भरता का अंत
l कोलंबो पोर्ट
l सिंगापूर पोर्ट
वर्तमान स्थिति: भारत का लगभग 25% कंटेनर विदेशी बंदरगाहों से ट्रांसशिप होता है
- उच्च लॉजिस्टिक्स लागत
- सामरिक जोखिम
परियोजना के बाद:
- 40 लाख TEU क्षमता (पहला चरण – 2028)
- 2058 तक 1.6 करोड़ TEU क्षमता
- लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी
- प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष हजारों करोड़ की बचत
यह भारत को समुद्री उपभोक्ता से समुद्री शक्ति में परिवर्तित करेगा।
🛡️ 4️⃣ चीन की समुद्री रणनीति का संतुलन
- हंबनटोटा बंदरगाह (श्रीलंका)
- ग्वादर बंदरगाह (पाकिस्तान)
चीन ने हिंद महासागर में बंदरगाह निवेश कर रणनीतिक घेरा बनाया
- हंबनटोटा, ग्वादर, क्यौकफ्यू जैसे पोर्ट इसके उदाहरण
ग्रेट निकोबार परियोजना:
- नौसैनिक तैनाती आसान करेगी
- समुद्री निगरानी मजबूत करेगी
- इंडो-पैसिफिक संतुलन में भारत की भूमिका सशक्त करेगी
🏗️ 5️⃣ बहुआयामी विकास मॉडल
परियोजना चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
- 🔹 इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (गहरे ड्राफ्ट के साथ)
- 🔹 ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (नागरिक + सैन्य उपयोग)
- 🔹 450 मेगावॉट पावर प्लांट
- 🔹 योजनाबद्ध आधुनिक टाउनशिप
यह समग्र विकास मॉडल है — बंदरगाह + ऊर्जा + शहरीकरण + सुरक्षा।
🇮🇳 6️⃣ राष्ट्रवादी नेतृत्व की दीर्घकालिक दृष्टि
समर्थकों का मत है कि वर्तमान नेतृत्व:
✔ दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टि रखता है
✔ स्पष्ट रणनीतिक रोडमैप पर कार्य करता है
✔ संसाधनों की उपलब्धता और क्रियान्वयन क्षमता सुनिश्चित करता है
✔ राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देता है
इसके विपरीत आलोचकों का आरोप रहा है कि पूर्ववर्ती दशकों में:
❌ बड़े सामरिक निर्णयों में देरी
❌ दीर्घकालिक समुद्री रणनीति की कमी
❌ भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप
❌ अल्पकालिक राजनीतिक समीकरणों पर अत्यधिक ध्यान
समर्थकों का तर्क है कि अब विकास मॉडल “सुरक्षा + अर्थव्यवस्था + वैश्विक प्रतिष्ठा” पर केंद्रित है।
🌱 7️⃣ पर्यावरणीय संतुलन और जनजातीय संरक्षण
- NGT द्वारा सशर्त मंजूरी
- जैव विविधता संरक्षण उपाय
- शोम्पेन और निकोबारी समुदायों की सुरक्षा
- चरणबद्ध निर्माण
वास्तविक सफलता इस संतुलन पर निर्भर करेगी कि विकास और संरक्षण साथ-साथ चलें।
📈 8️⃣ दीर्घकालिक अवसर
ग्रेट निकोबार परियोजना से संभावित लाभ:
🔹 लॉजिस्टिक्स लागत में स्थायी कमी
🔹 वैश्विक निवेश आकर्षण
🔹 इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक नेतृत्व
🔹 लाखों रोजगार
🔹 अंडमान-निकोबार क्षेत्र का संरचित विकास
🔹 समुद्री निर्यात प्रतिस्पर्धा में वृद्धि
ये अवसर दशकों तक आर्थिक वृद्धि की नींव रख सकते हैं।
🔱 समुद्री पुनर्जागरण की शुरुआत
- ग्रेट निकोबार परियोजना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश नहीं — यह भारत की समुद्री सोच में बदलाव का प्रतीक है।
यदि यह परियोजना समयबद्ध, पारदर्शी और पर्यावरण संतुलन के साथ पूर्ण होती है, तो:
- भारत हिंद महासागर में निर्णायक शक्ति बनेगा
- विदेशी निर्भरता घटेगी
- दीर्घकालिक विकास के नए द्वार खुलेंगे
- राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत होगी
यह 21वीं सदी के भारत के लिए समुद्री पुनर्जागरण की आधारशिला बन सकती है।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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