क्यों आत्ममंथन अब टाला नहीं जा सकता
1️⃣ आत्ममंथन अब टाला नहीं जा सकता
- इतिहास किसी समाज को उसके शत्रुओं से नहीं, बल्कि उसकी गलत प्राथमिकताओं और नेतृत्व की निष्क्रियता से दंडित करता है।
- आज यदि सनातन धर्म, हिंदू समाज और भारत की सुरक्षा–संप्रभुता पर लगातार खतरे महसूस हो रहे हैं, तो केवल बाहरी शक्तियों या “इकोसिस्टम” को दोष देना अधूरा सत्य है।
- हमें अपने धार्मिक नेतृत्व और हिंदुत्व सामाजिक संगठनों की भूमिका पर भी ईमानदारी से विचार करना होगा।
2️⃣ धार्मिक नेतृत्व की चूक — भक्ति सिखाई, कर्तव्य नहीं
धार्मिक नेतृत्व का ऐतिहासिक दायित्व रहा है:
- समाज को दिशा देना
- सही–गलत का भेद सिखाना
- संकट के समय मार्गदर्शन करना
लेकिन आज वास्तविकता यह है:
- प्रवचन अधिकतर व्यक्तिगत मोक्ष तक सीमित हैं
- समाज और राष्ट्र की रक्षा को “राजनीति” कहकर टाल दिया जाता है
- कर्तव्य, त्याग और नागरिक उत्तरदायित्व पर स्पष्ट मार्गदर्शन का अभाव है
परिणाम:
- भक्त पूजा में व्यस्त हैं
- लेकिन समाज असुरक्षित है
- और राष्ट्र-रक्षा को “सरकार का विषय” मान लिया गया है
धर्म यदि कर्तव्य से कट जाए, तो वह केवल कर्मकांड बनकर रह जाता है।
3️⃣ हिंदुत्व सामाजिक संगठनों की विफलता — लक्ष्य से भटकाव
हिंदुत्व संगठनों से अपेक्षा थी कि वे:
- समाज को संगठित करेंगे
- प्राथमिकताओं का सही क्रम सिखाएंगे
- व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र-हित को स्थापित करेंगे
लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है:
- संगठन आपस में अहंकार और प्रभाव की लड़ाई में उलझे हैं
- नेतृत्व निर्माण से अधिक व्यक्तिगत ब्रांडिंग पर जोर है
- समाज को त्याग और अनुशासन के बजाय भावनात्मक उत्तेजनादी जाती है
- संकट के समय दीर्घकालिक रणनीति के बजाय तात्कालिक प्रतिक्रियाएँ
इसका नतीजा:
- समाज भ्रमित है
- प्राथमिकताएँ उलटी हैं
और विरोधी तंत्र संगठित होकर लाभ उठा रहा है
4️⃣ व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और लालच — सबसे बड़ा आंतरिक शत्रु
धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व में भी एक खतरनाक प्रवृत्ति दिखती है:
- पद, प्रतिष्ठा और प्रभाव की लालसा
- अनुयायियों की संख्या पर प्रतिस्पर्धा
- सत्ता के करीब रहने की कोशिश
- सच्चाई के बजाय सुविधाजनक मौन
जब नेतृत्व ही:
- जोखिम लेने से बचे
- स्पष्ट मार्गदर्शन न दे
- और समाज को “आराम” में रहने दे
तो समुदाय असुरक्षा की ओर बढ़ता है।
5️⃣ प्राथमिकताओं का उलट क्रम — मूल समस्या
समाज को यह सिखाया ही नहीं गया कि:
- देश पहले
- फिर धर्म और समुदाय
- और अंत में व्यक्तिगत हित
इसके विपरीत:
- व्यक्ति पहले
- परिवार पहले
- संगठन पहले
- और देश/समाज “जब समय मिले”
यह क्रम हर सभ्यता को कमजोर करता है।
यदि देश सुरक्षित नहीं है तो:
- न धर्म सुरक्षित रहेगा
- न समुदाय
- न धार्मिक स्वतंत्रता
- न भविष्य की पीढ़ियाँ
6️⃣ मौन, निष्क्रियता और नेतृत्व की गैर-जिम्मेदारी
जब धर्म/समाज पर संकट आता है:
- धार्मिक नेतृत्व चुप रहता है
- सामाजिक संगठन आधे बयान देकर रुक जाते हैं
- कोई स्पष्ट आह्वान नहीं
- कोई दीर्घकालिक मार्गदर्शन नहीं
इस चुप्पी का संदेश साफ जाता है:
- “यह हमारी प्राथमिकता नहीं है।”
और यही संदेश विरोधी तंत्र के लिए सबसे बड़ा प्रोत्साहनबन जाता है।
7️⃣ राजनीतिक चेतना की कमी — नेतृत्व का मार्गदर्शन शून्य
यदि धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व:
- मतदान को धर्म नहीं बनाता
- नागरिक सहभागिता सिखाता नहीं
- लोकतांत्रिक शक्ति के उपयोग पर ज़ोर नहीं देता
तो समाज:
- चुनाव से दूर रहता है
- बाद में केवल शिकायत करता है
राजनीतिक निष्क्रियता आध्यात्मिकता नहीं, आत्मघात है।
8️⃣ परिणाम — समाज असंगठित, शत्रु संगठित
इन सभी चूकों का संयुक्त परिणाम:
- समाज बिखरा हुआ
- नेतृत्व दिशाहीन
- युवा भ्रमित
- पीड़ित अकेले
- और विरोधी तंत्र संगठित व निडर
हम स्वयं अपने विरोधियों के लिए खुला मैदान तैयार कर देते हैं।
9️⃣ अब क्या बदलना होगा — कठोर लेकिन आवश्यक सुधार
धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व को:
- राष्ट्र-प्रथम सोच को स्पष्ट रूप से स्थापित करना होगा
- भक्ति के साथ कर्तव्य सिखाना होगा
- व्यक्तिगत लालच और महत्वाकांक्षा पर संयम
- समाज को त्याग, अनुशासन और नागरिक साहस का पाठ
- संकट के समय मौन नहीं, वैधानिक मार्गदर्शन
समाज को भी:
- अंध-श्रद्धा नहीं, जागरूक नेतृत्व चुनना होगा
- सवाल पूछने होंगे
- और प्राथमिकताओं को ठीक करना होगा
🔚 नेतृत्व बदलेगा, तभी समाज बचेगा
सनातन धर्म केवल ग्रंथों से नहीं बचता, वह जिम्मेदार समाज और जागरूक नेतृत्व से बचता है।
यदि धार्मिक नेतृत्व और हिंदुत्व संगठन:
अब भी प्राथमिकताएँ स्पष्ट नहीं करेंगे
अब भी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को नहीं छोड़ेंगे
तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें याद करेंगी— एक ऐसे समाज के रूप में जिसने सब कुछ होते हुए भी सब कुछ खो दिया।
- अब भी समय है—लेकिन केवल तभी, जब नेतृत्व और समाज दोनों बदलें।
- राष्ट्रवादी सरकार आ पूरा समर्थन करके देश धर्म और हिन्दु समाज की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहें।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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