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हिंदू समाज

हिंदू समाज – दान से धर्म नहीं बचेगा, धर्मरक्षा से बचेगा

🕉️ हिंदू समाज की वास्तविकता

  • हिंदू धर्म का मूलभूत स्वभाव सेवा और त्याग है।
  • हमारे धर्मगुरु ब्रह्मचर्य, संयम और तपस्या का उपदेश देते हैं।
  • समाज भंडारे करता है, मंदिर बनाता है, रक्तदान करता है, अस्पताल और अनाथालय चलाता है।
  • योग शिविर, ध्यान शिविर और साधना से आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाया जाता है।
  • यह सब निस्संदेह महान और आदर्श कार्य हैं। लेकिन एक मूल प्रश्न उठता है –


👉 जब धर्म, संस्कृति और अस्तित्व ही संकट में हैं, तो क्या केवल सेवा और पुण्य ही हमें बचा पाएंगे?

⚔️ दूसरी तरफ़ की रणनीति

  • मौलवी और इस्लामी नेतृत्व अपने अनुयायियों को क्या शिक्षा देता है?
  • “जनसंख्या बढ़ाओ, इस्लाम फैलाओ, हर हाल में संख्या शक्ति बढ़ाओ।”
  • उनका दान – ज़कात – सीधे मज़हबी विस्तार, मदरसों और मज़हबी एजेंडे पर खर्च होता है।
  • मुफ्त योजनाएँ, सरकारी स्कीमें और सुविधाएँ – इनका लाभ अधिकतम लिया जाता है।
  • वोटिंग में एकजुटता, सड़क पर आक्रामकता और सामूहिक दबाव बनाना – यह उनकी रणनीति का हिस्सा है।

👉 वे हर क्षण तैयारी और विस्तार में लगे हैं।
👉 उनका लक्ष्य साफ है – भारत को धीरे-धीरे इस्लामी राष्ट्र बनाना।

🛑 हिंदू समाज की सबसे बड़ी भूल

  • हमने कभी “युद्ध की तैयारी” नहीं की।
  • हमने न हथियार खरीदे, न चलाना सीखा।
  • अपने बच्चों को न आत्मरक्षा सिखाई, न वीरता का प्रशिक्षण दिया।
  • हमने सेवा और दान को ही धर्म समझ लिया और धर्म–रक्षा के कर्तव्य को भुला दिया।

👉 परिणाम यह हुआ कि जब भी हिंदुओं पर हमले हुए, हम सिर्फ़ सोशल मीडिया पर शोर मचाते रहे।
👉 सरकार को दोष देते रहे।
👉 लेकिन अपराधियों को कभी “सीधा उत्तर” नहीं दिया।

यही वजह है कि –

  • गोधरा कांड के बाद जब गुजरात ने निर्णायक प्रतिकार किया, तो वहाँ आज तक हिंदुओं पर बड़े हमले करने की हिम्मत नहीं हुई।
  • लेकिन जहाँ प्रतिकार नहीं हुआ, वहाँ बार-बार हिंसा और आतंक दोहराया जाता है।
  • अगर हमने नागपूर हिंसा के वक्त उनपर गोधरा की तरह निर्णायक प्रहार किया होता तो उसके बाद उनकी हिंसा करने की हिम्मत ही नहीं होती।

🌋 आज की स्थिति – और खतरे

आज हिंदू समाज एक गहरी नींद में है –

  • युवा और मध्यम आयु वर्ग सिर्फ़ रोज़गार और संपत्ति बनाने में व्यस्त हैं।
  • प्रख्यात हिंदुत्व संगठन आपस में बँटे हैं, अपनी-अपनी महत्त्वाकांक्षाओं और अहंकार में फँसे हैं।
  • धार्मिक गुरु और कथावाचक केवल प्रवचन और चंदा इकट्ठा करने तक सीमित हैं।

👉 कोई भी गंभीरता से यह नहीं सोच रहा कि धर्म और राष्ट्र को बचाना ही सबसे बड़ा कर्तव्य है।
👉 जबकि विपक्षी दल, इस्लामी ताकतें और विदेशी “डीप स्टेट” एकजुट हैं, उनके पास रणनीति है, एक्शन प्लान है, और वे बिना झिझक अपने एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

🚩 क्या करना होगा?

अब हिंदू समाज को दिशा बदलनी होगी।

1. एकता

  • सभी हिंदू संगठन, धार्मिक मंच और समुदायों को एक साझा मंच पर आना होगा।
  • व्यक्तिगत स्वार्थ और अहंकार छोड़कर एक ही लक्ष्य तय करना होगा – सनातन और भारत की रक्षा

2. स्वरक्षा और शौर्य प्रशिक्षण

  • हर हिंदू परिवार को हथियार रखना और चलाना आना चाहिए।
  • गाँव–गाँव और शहर–शहर शौर्य शिविर लगने चाहिए।
  • बच्चों और युवाओं को मार्शल आर्ट्स, आत्मरक्षा और युद्धकला का प्रशिक्षण मिलना चाहिए।

3. आर्थिक और मानसिक स्वतंत्रता

  • दान–पुण्य सिर्फ़ साधुओं और आयोजनों तक न सिमटे, बल्कि रक्षा और सुरक्षा में भी लगे।
  • मंदिरों की आय का एक बड़ा हिस्सा धर्म–रक्षा और सुरक्षा तंत्र पर खर्च होना चाहिए।

4. संस्कार और शिक्षा

  • कथा और भक्ति के साथ-साथ शौर्यगाथाओं का भी प्रचार हो।
  • युवाओं को सिर्फ़ संयम नहीं, बल्कि साहस और प्रतिकार भी सिखाया जाए।

5. तेज और रणनीति

🔔 समय अभी है

👉 हिंदू समाज का धर्म केवल भजन, प्रवचन और दान नहीं है।
👉 धर्म का पहला कर्तव्य है – उसकी रक्षा।

  • आज अगर हम नहीं जागे,
  • तो कल रोने के अलावा हमारे पास कुछ नहीं बचेगा।

🕉️ अब समय है सेवा से आगे बढ़कर रक्षा का।
🕉️ अब समय है भंडारे से आगे बढ़कर शौर्य शिविरों का।
🕉️ अब समय है दान से आगे बढ़कर शस्त्र और प्रशिक्षण का।

क्योंकि –
👉 जो समाज युद्ध के लिए तैयार नहीं होता, उसे इतिहास से मिटा दिया जाता है।

🙏 जय श्रीराम | जय सनातन | जय भारत 🙏

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