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आयरन डोम

आयरन डोम से आगे: आयात-निर्भरता से संप्रभु रक्षा तक

आयात-निर्भर रक्षा से संप्रभु सुरक्षा की ओर भारत का बदलाव

  • भारत का विदेशी एयर-डिफेंस प्रणालियों—चाहे NASAMS हों या आयरन डोम जैसे मॉडल—से दूरी बनाकर पूरी तरह स्वदेशी, बहु-स्तरीय एयर-डिफेंस शील्ड विकसित करने का निर्णय इस दशक का सबसे बड़ा रणनीतिक बदलाव है।
  • यह केवल रक्षा-खरीद का फैसला नहीं, बल्कि रणनीतिक सिद्धांतों का पुनर्लेखन है।

इसका मूल संकल्प स्पष्ट है—

  • निर्भरता समाप्त करना, आर्म-ट्विस्टिंग रोकना और भारत की सुरक्षा व संप्रभुता सुनिश्चित करना, न केवल रक्षा में बल्कि सभी महत्वपूर्ण तकनीकों में।
  • आयातित “डोम” भारत के लिए क्यों उपयुक्त नहीं

आयातित प्रणालियाँ सीमित परिस्थितियों में प्रभावी हो सकती हैं, पर भारत जैसे बड़े, बहु-दिशात्मक खतरों वाले देश के लिए इनकी सीमाएँ स्पष्ट हैं:

  • संकट में विदेशी सप्लाई-चेन पर निर्भरता
  • प्रतिबंध, निर्यात नियंत्रण और राजनीतिक दबाव का जोखिम
  • कोर सॉफ़्टवेयर व डेटा पर स्वामित्व का अभाव
  • युद्धकालीन अपग्रेड और रणनीति में सीमित स्वतंत्रता

जिस सुरक्षा को बाहर से रोका या शर्तों पर बाँधा जा सके, वह वास्तविक सुरक्षा नहीं है।

नया राष्ट्रीय संकल्प

भारत ने कड़वे अनुभवों से सीखा है कि:

  • निर्भर देश को दबाया जा सकता है
  • सैन्य तत्परता कूटनीतिक अनुमति की बंधक बन जाती है

इसलिए अब स्पष्ट नीति है:

  • कोई महत्वपूर्ण क्षमता विदेशी नियंत्रण में नहीं
  • कोई रणनीतिक निर्णय स्पेयर पार्ट्स या अनुमति पर आधारित नहीं

युद्धों से मिले सबक और भारत का उत्तर

  • आधुनिक युद्धों ने दिखाया कि सस्ते ड्रोन पर महँगे इंटरसेप्टर आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं।


भारत का समाधान:

बहु-स्तरीय, स्केलेबल और लागत-प्रभावी शील्ड

  • लेज़र जैसी डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स, जहाँ प्रति-शॉट लागत केवल बिजली है
  • दीर्घ-मार्ग निषेध, जिससे हमला शुरू होने से पहले ही किल-चेन टूटे

यह रक्षा को प्रतिक्रिया से रोकथाम की ओर ले जाता है।

असली संप्रभुता: एकीकरण और नियंत्रण

भारत का दृष्टिकोण:

  • सेंसर-फ्यूज़न और एकीकृत बैटल-मैनेजमेंट
  • मिसाइल, CIWS और लेज़र का निर्बाध समन्वय
  • डेटा, निर्णय और अपग्रेड पूरी तरह भारतीय नियंत्रण में

रक्षा से आगे—राष्ट्रीय स्वायत्तता

यही सोच अब सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, अंतरिक्ष, दूरसंचार और साइबर क्षेत्रों में भी लागू है।

  • महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य विदेशी सद्भावना पर निर्भर नहीं हो सकते।

भारत का यह कदम एक स्पष्ट घोषणा है:

  • सुरक्षा खरीदी नहीं जाती, स्वामित्व में ली जाती है
  • निर्भरता दबाव बुलाती है, क्षमता स्वतंत्रता देती है

संप्रभुता अनुबंधों से नहीं, तकनीक से बनती है

🗿 यह केवल रक्षा सुधार नहीं—राष्ट्रीय स्वतंत्रता की संरचना है।

भारत अब सुरक्षा नहीं खरीद रहा, संप्रभुता गढ़ रहा है।

🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳

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