1. स्वतंत्रता से 2014 तक: शासन की विफलताओं का दौर
स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक भारत गहरी सभ्यतागत विरासत और अपार मानव संसाधन के बावजूद कमज़ोर शासन और संस्थागत अक्षमता से जूझता रहा। नीतियाँ बनीं, लेकिन उनका क्रियान्वयन कमजोर रहा।
इस दौर की प्रमुख समस्याएँ थीं:
- व्यापक भ्रष्टाचार और बड़े-बड़े घोटाले, जिनसे राष्ट्रीय संसाधनों की लूट हुई
- वोट-बैंक राजनीति, जहाँ समान कानून के बजाय तुष्टिकरण प्राथमिकता बना
- हिंदू समाज और सनातन धर्म का हाशियाकरण, विशेषकर शिक्षा और सार्वजनिक विमर्श में
- माफ़िया, उग्रवाद और असामाजिक तत्वों को राजनीतिक संरक्षण
- कमज़ोर आंतरिक सुरक्षा और लंबे समय तक नीति-गत जड़ता
परिणाम:
भारत आर्थिक रूप से पीछे रहा, संस्थाओं पर भरोसा कम हुआ और आम नागरिक ने असुरक्षा व भ्रष्टाचार को “सामान्य” मान लिया। भारत कोई कमजोर सभ्यता नहीं था, लेकिन वह एक कम-शासित गणराज्य बन गया।
2. 2014: एक राजनीतिक और मानसिक परिवर्तन
वर्ष 2014 ने देश को एक नया मोड़ दिया। शासन की दिशा में स्पष्ट बदलाव दिखा:
- तेज़ निर्णय और स्पष्ट जवाबदेही
- भ्रष्टाचार और नीति-गत भ्रम के प्रति कम सहनशीलता
- वोट-बैंक गणित से ऊपर राष्ट्रीय हित
- बिना अपराधबोध के सांस्कृतिक आत्मविश्वास
दशकों बाद नागरिकों को लगा कि राज्य अब रुक नहीं रहा, काम कर रहा है।
3. एक दशक में बदली राष्ट्रीय दिशा
बीते वर्षों में कई पुरानी प्रवृत्तियाँ बदलीं:
- भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना
- दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं बना
- अवसंरचना, डिजिटल सिस्टम और निर्माण क्षेत्र में तेज़ विस्तार
- रक्षा क्षेत्र में आयात से निर्यात की ओर बढ़त
- सनातन सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान को सार्वजनिक जीवन में सम्मान
यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास की वापसी थी।
4. पुराना तंत्र क्यों असहज है
यह परिवर्तन उन शक्तियों को असहज करता है जो:
- भ्रम, भ्रष्टाचार और निर्भरता से लाभ उठाती थीं
- विभाजन और अस्थिरता से अपनी राजनीति चलाती थीं
इसी कारण आजकल सुधारों के विरुद्ध:
- गलत सूचना
- अनावश्यक आंदोलन
- संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशें दिखाई देती हैं।
5. आज का असली प्रश्न
आज सवाल किसी व्यक्ति या दल का नहीं, बल्कि दिशा का है:
- कमजोरी या मज़बूती
- तुष्टिकरण या समान कानून
- निर्भरता या आत्मनिर्भरता
भारत एक दुर्लभ ऐतिहासिक अवसर पर खड़ा है।
उन्नयन की रक्षा
कमजोरी से आत्मविश्वास तक भारत की यात्रा शुरू हो चुकी है। इसे बनाए रखना नागरिकों की समझ, संस्थागत स्थिरता और राष्ट्रीय एकता पर निर्भर करता है।
- यह यात्रा केवल सरकार की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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