📌 न्यायपालिका की गिरती साख: जब ‘माई लॉर्ड’ बन गए ‘माई डिक्टेटर’
- भारत में न्यायपालिका का उद्देश्य है – न्याय देना, संविधान की रक्षा करना, और सबको समान अवसर सुनिश्चित करना। परंतु वर्तमान में यह संस्था अक्सर सीमाओं को लांघते हुए लोकतंत्र को नियंत्रित करने का प्रयास करती दिख रही है।
- अमेरिका में, एक अवैध प्रवासी को छुड़ाने की कोशिश करने वाले जज को कोर्टरूम में ही गिरफ्तारकर लिया गया।
- लेकिन भारत में, 600 करोड़ का कोकीन रखने वाले अपराधी को पैरोल पर रिहा करने वाले जज को पूजा जाता है, सवाल नहीं किया जाता।
- क्या यही “Rule of Law” है या “Rule by Judicial Elites”?
⚖️ न्यायपालिका या राजनीति का नया केंद्र?
- कई हालिया फैसलों ने न्यायपालिका की राजनीतिक सोच और पक्षपातको उजागर किया है:
- हिंदू त्योहारों पर ध्वनि प्रतिबंध,
- मंदिरों की संपत्तियों को राज्य नियंत्रण में देना,
- वहीं वक्फ बोर्ड को करोड़ों की जमीनें सौंपना बिना जांच या आपत्तिके।
❗ एकतरफा रवैया:
- हिंदू ट्रस्ट्स को सरकार नियंत्रित करती है।
- वक्फ बोर्ड को सरकार और न्यायपालिका दोनों विशेष संरक्षण देते हैं।
- यहां तक कि वक्फ संपत्तियों को “बियॉन्ड स्क्रूटनी” माना गया है — यानी उस पर न कानून लागू होता है, न आरटीआई और न सरकार की निगरानी।
🕌 वक्फ बोर्ड: भारत में एक समानांतर इस्लामिक सत्ता?
- भारत में वक्फ बोर्ड के पास लगभग 8 लाख एकड़ से अधिक जमीन है — ये लगभग गोवा या दिल्ली जितना क्षेत्रफल है।
- इन जमीनों पर मस्जिदें, मदरसे, शॉपिंग मॉल्स और प्राइवेट संपत्तियांबनाई गई हैं।
- पर इन पर न टैक्स लागू होता है, न सरकार सवाल पूछ सकती है।
➡️ हिंदू मंदिरों से हर साल करोड़ों रुपये टैक्स वसूला जाता है, जबकि वक्फ बोर्ड को अनुदान भी मिलता है और सब्सिडी भी।
💰 न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार के आरोप और दोहरा मापदंड
- कई हाई प्रोफाइल जजों पर भ्रष्टाचार, पक्षपात, और जातिवादी टिप्पणियों के आरोप लग चुके हैं।
- पूर्व मुख्य न्यायाधीश पर भी यौन उत्पीड़न और राजनीतिक लाभ उठाने के गंभीर आरोप लगे।
- लेकिन जांच और पारदर्शिता के नाम पर “इनहाउस” जांच का बहाना बनाकर सबकुछ दबा दिया जाता है।
📚 इतिहास से सबक: मुस्लिम सैनिकों और नागरिकों की विश्वासघात की लंबी परंपरा
भारत के इतिहास में कई उदाहरण हैं जहाँ मुस्लिम सैनिकों ने हिंदू नायकों के साथ गद्दारी की:
🛡️ 1947 – गोरखा पलटन में गद्दारी
- मुस्लिम सैनिकों ने अपने ही गोरखा भाइयों को मार डाला।
- कप्तान रघुबीर सिंह थापा को जिंदा जला दिया गया।
पं. नेहरू ने घटना को दबा दिया, सच्चाई बाहर नहीं आने दी।
🛡️ 1965 – मुस्लिम रेजिमेंट ने पाकिस्तान के लिए लड़ने से इनकार किया
- करीब 30,000 मुस्लिम सैनिकों ने भारत के खिलाफ जाकर पाकिस्तान का साथ दिया।
- शास्त्री जी ने रेजिमेंट को भंगकरना पड़ा।
🛡️ आज – भारत में रहने वाले कट्टरपंथी तत्व, शाहीन बाग से लेकर रामनवमी हिंसा तक,
- देश के कानून, संविधान, और बहुसंख्यकों की आस्था का लगातार अपमान करते हैं।
🧠 सोचिए – क्या यह सच्ची धर्मनिरपेक्षता है?
क्या यह न्याय है जब:
- भगवा झंडा लगाने पर एफआईआर होती है,
- लेकिन लाल मस्जिदों और मोहल्लों में खुलेआम नारे लगते हैं, और कोई पूछता तक नहीं?
क्या यह धर्मनिरपेक्षता है जब:
- एक देश में 80% हिंदू होने के बावजूद,
- हर नीति, हर फैसले, हर कानून मुस्लिम तुष्टीकरणको ध्यान में रखकर बनाया जाता है?
🚩 समाधान क्या है?
- न्यायपालिका की पारदर्शिता के लिए कठोर कानून बनें।
- वक्फ बोर्ड की जांच और RTI के दायरे में लाया जाए।
- समान आस्था कानून लागू हो: मंदिर-मस्जिद चर्च इत्यादि सभी पर एक जैसा नियम।
- सनातन धर्म की रक्षा के लिए हिन्दू समाज एकजुट हो, सशक्त हो।
- संसद सर्वोपरि है — “जजक्रेसी” नहीं, लोकतंत्र चले।
🔊 यह लड़ाई अब केवल न्याय की नहीं, अस्तित्व की भी है।
- यदि हिंदू अब भी न जागे, तो आने वाले वर्षों में न्यायपालिका, तुष्टिकरण, और इस्लामी कट्टरता मिलकर भारत को एक “नया पाकिस्तान” बना देंगे।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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