सारांश
- बीते ग्यारह वर्षों में भारत ने राष्ट्रवादी, स्थिर और प्रगतिशील शासन के माध्यम से न केवल नीतिगत सुधार देखे हैं, बल्कि जन-चेतना का अभूतपूर्व परिवर्तन भी अनुभव किया है।
- आज का भारतीय मतदाता नारों, डर और झूठे नैरेटिव से ऊपर उठकर परिणाम, राष्ट्रीय हित और दीर्घकालिक विकास के आधार पर निर्णय लेता है।
- कांग्रेस और तथाकथित ठगबंधन द्वारा दशकों से खेली जा रही विभाजन, तुष्टिकरण और भ्रम की राजनीति अब बेनकाब हो चुकी है—जिसका प्रमाण हरियाणा से लेकर हालिया BMC चुनावों तक लगातार मिल रहा है।
- वोट-बैंक की राजनीति अपना असर खो रही है, क्योंकि मुस्लिम समाज सहित देश का व्यापक वर्ग यह समझ चुका है कि भावनात्मक तुष्टिकरण से सत्ता तो मिल सकती है, जीवन और देश का वास्तविक उत्थान नहीं।
- प्रधानमंत्री मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के सिद्धांत—बिना किसी धार्मिक या वैचारिक भेदभाव के, और उग्रवाद व राष्ट्रविरोध पर शून्य सहनशीलता—ने भारत को निरंतर ऊँचाइयों पर पहुँचाया है और आने वाले वर्षों में वैश्विक महाशक्ति बनने की ठोस नींव रखी है।
जागरूक नागरिक, विफल ठगबंधन, और भारत का तेज़ी से उभरता भविष्य
1. बदली हुई जनता: नारों से नहीं, नीतियों से फैसला
आज का भारत वैसा नहीं रहा जैसा दशकों तक समझा गया।
- मतदाता अब भावनात्मक उकसावे में नहीं आता
- जाति, क्षेत्र और डर की राजनीति असर खो रही है
- निर्णय राष्ट्रहित, स्थिरता और परिणाम देखकर हो रहे हैं
- नागरिकों ने ग्यारह वर्षों में शासन की नियत और नतीजे—दोनों देखे हैं
यह बदलाव अचानक नहीं आया—यह अनुभव और समझ से पैदा हुआ है।
2. पुराना खेल: विभाजन और तुष्टिकरण
दशकों तक एक ही रणनीति अपनाई गई:
- हिंदू समाज को जाति, वर्ग और क्षेत्र में बाँटना
- मुस्लिम समाज को भावनात्मक तुष्टिकरण के सहारे साधना
- सत्ता पाना, पर विकास टालना
परिणाम:
- न हिंदुओं का वास्तविक उत्थान
- न मुसलमानों की शिक्षा, रोज़गार और सुरक्षा
- केवल कुछ परिवारों और नेताओं की सत्ता
यह वोट-बैंक की राजनीति थी—विकास की नहीं।
3. चुनाव दर चुनाव सच्चाई उजागर
यदि किसी को संदेह है, तो चुनावी परिणाम स्वयं बोलते हैं:
- हरियाणा में करारी हार
- दिल्ली में जनता का स्पष्ट संदेश
- महाराष्ट्र में आधार खिसका
- बिहार में पकड़ ढीली
- और हालिया BMC चुनाव—जहाँ सूपड़ा साफ़
हर चुनाव के साथ:
- इन दलों का जनाधार घटता गया
- शोर बढ़ता गया, असर कम होता गया
- और जनता का फैसला और स्पष्ट होता गया
4. जितना शोर, उतनी तेज़ गिरावट
आज स्थिति यह है कि:
- झूठे नैरेटिव जितने ज़ोर से फैलते हैं
- जनता उतनी ही तेज़ी से उन्हें नकारती है
- डराने की कोशिश जितनी बढ़ती है
- राष्ट्रवादी ताकतें उतनी ही मज़बूत होती हैं
सच यह है:
- ठगबंधन और कांग्रेस खुद अपनी राजनीतिक कब्र खोद रहे हैं
- और अनजाने में BJP / NDA / राष्ट्रवादी संगठनों को और मज़बूत जनादेश दे रहे हैं।
5. मुस्लिम समाज का भी बदला दृष्टिकोण
सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन यही है कि अब मुस्लिम समाज का बड़ा वर्ग भी सवाल पूछ रहा है:
- दशकों तक केवल वोट के लिए इस्तेमाल
- भावनात्मक तुष्टिकरण, पर ठोस विकास नहीं
- सत्ता मिलते ही उपेक्षा
आज यह वर्ग समझ रहा है:
- सम्मान और अवसर नीति से मिलते हैं, नारों से नहीं
- शिक्षा, सुरक्षा और रोज़गार स्थिर शासन में ही संभव हैं
6. मोदी मॉडल: तुष्टिकरण नहीं, राष्ट्र निर्माण
प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण स्पष्ट है:
- सबका साथ – हर नागरिक के साथ
- सबका विकास – बिना धर्म, जाति या विचारधारा के भेद
- सबका विश्वास – लेकिन उग्रवाद, जिहाद और राष्ट्रविरोध पर शून्य सहनशीलता
यह मॉडल:
- न किसी का पक्षपात करता है
- न किसी को विशेषाधिकार देता है
- यह न्याय, अवसर और सुरक्षा का संतुलन है
7. भारत की निरंतर प्रगति का आधार
इसी सोच का परिणाम है कि:
- भारत आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है
- आंतरिक सुरक्षा सुदृढ़ हुई है
- वैश्विक मंचों पर विश्वास बढ़ा है
- समाज में स्थिरता और आत्मविश्वास आया है
हर वर्ष:
- झूठे नैरेटिव कमजोर पड़ते हैं
- जागरूकता मजबूत होती है
- और भारत नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ता है
8. जागरूक राष्ट्र, मज़बूत भविष्य
आज भारत:
- केवल चुनाव नहीं जीत रहा
- बल्कि विभाजन और भ्रम की राजनीति को पीछे छोड़ रहा है
ठगबंधन और कांग्रेस:
- जितना अधिक भ्रम फैलाएँगे
- उतना ही तेज़ अप्रासंगिक होते जाएँगे
भारत:
- हर साल अधिक सशक्त बनेगा
- और आने वाले समय में एक निर्णायक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरेगा
शब्द
- देश जाग चुका है।
- जनता समझ चुकी है।
- और विकास की दिशा तय हो चुकी है।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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