पक्षपात से प्रचार तक
- लोकतंत्र में स्वतंत्र प्रेस अनिवार्य है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता तथ्यों की शुद्धता, संतुलन और जवाबदेही पर टिकी होती है।
- जब रिपोर्टिंग बार-बार तथ्यों और व्याख्याओं को मिलाती है, या अधूरी जानकारी को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करती है, तब वह समीक्षा नहीं बल्कि धारणा निर्माण बन जाती है।
- पिछले एक दशक में भारत की कुछ चुनिंदा अंग्रेज़ी मीडिया संस्थाएं जिन्हें अक्सर “लुटियंस मीडिया” कहा जाता है, उनपर यही आरोप लगे हैं, जिनमें The Wire जैसा प्लेटफ़ॉर्म प्रमुख हैं।
एक-दो भूल नहीं, एक पैटर्न
कई विषयों पर समान प्रवृत्तियाँ दिखती हैं:
- भड़काऊ हेडलाइन, जबकि लेख भीतर शर्तों और सावधानियों से भरा
- स्रोतों की चयनात्मक व्याख्या
- अधूरी पुष्टि के साथ आरोपों का प्रसार
- विश्लेषण को तथ्य की तरह पेश करना
- खंडन या स्पष्टीकरण को सीमित दृश्यता
नतीजा यह कि पहली छाप स्थायी बन जाती है, जबकि सुधार पीछे रह जाते हैं।
2014 के बाद का नैरेटिव संघर्ष
2014 के बाद:
- सुधारों को “तानाशाही” कहकर अतिरंजित किया गया
- अलग-थलग असफलताओं को बढ़ाया गया, उपलब्धियों को कम आँका गया
- संवैधानिक संस्थाओं पर डिफ़ॉल्ट अविश्वास पैदा किया गया
- सभ्यतागत अभिव्यक्ति को संदर्भ से काटकर “अतिवाद” कहा गया
इससे तथ्यपरक बहस के बजाय अविश्वास फैला।
आलोचकों के अनुसार निहित उद्देश्य
आलोचकों का मानना है कि लक्ष्य 2014-पूर्व व्यवस्था की वापसी है—जहाँ
- एलीट नीति-पहुँच,
- सीमित जवाबदेही,
- सार्वजनिक धन का रिसाव आम थे।
सुधारों ने इन ढाँचों को तोड़ा, जिससे असहजता बढ़ी।
चुनाव, संस्थाएँ और जल्दबाज़ आरोप
- बिना ठोस प्रमाण चुनावी हेरफेर के संकेत:
- चुनावी भरोसा घटाते हैं
- संस्थाओं की साख कमजोर करते हैं
- मतदाताओं में नकारात्मकता बढ़ाते हैं
लोकतंत्र में आलोचना के साथ संयम भी ज़रूरी है।
उच्च-जोखिम क्षेत्र: स्वास्थ्य और सुरक्षा
इन क्षेत्रों में गलत रिपोर्टिंग का सीधा असर पड़ता है:
- स्वास्थ्य में हिचकिचाहट,
- सुरक्षा में ख़तरे की विकृत समझ
यहाँ अतिरिक्त कठोरता अनिवार्य है।
जिम्मेदार पत्रकारिता की कसौटी
- स्रोत-निष्ठा
- सत्यापित हेडलाइन
- रिपोर्टिंग और राय की स्पष्ट पहचान
- खंडन को समान प्रमुखता
- सभी विचारधाराओं पर समान मानक
- फंडिंग व हित-संघर्ष की पारदर्शिता
- यह सेंसरशिप की माँग नहीं, उच्च पत्रकारिता मानकों की पुकार है।
- आलोचना लोकतंत्र को मज़बूत करती है;
- प्रचार उसे कमजोर करता है।
विश्वसनीयता खोना आसान है—लौटाना कठिन।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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