राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने दशकों से सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभाव के माध्यम से समाज को मजबूत किया है। आज भारत वैचारिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में पंच परिवर्तन के माध्यम से सेवा के साथ जागरण, एकता और संगठन अनिवार्य हो गए हैं
I. नई वास्तविकता
- एक संगठित anti-national, anti-Hindu ecosystem
- मीडिया, शिक्षा, NGO और राजनीति के माध्यम से सक्रिय
- हिंदू समाज को बाँटने और सांस्कृतिक आत्मविश्वास कमजोर करने के प्रयास
👉 अब RSS को जागरूकता बढ़ाने, वैचारिक स्पष्टता देने और समाज को संगठित करने की भूमिका भी निभानी होगी।
II. वर्तमान संदर्भ में पंच परिवर्तन
सामाजिक समरसता
- जाति, भाषा, क्षेत्र और संप्रदाय से ऊपर हिंदू एकता
- पहचान और वोट-बैंक राजनीति का प्रतिरोध
कुटुंब प्रबोधन
- परिवार को संस्कार और राष्ट्रबोध की आधारशिला बनाना
- बच्चों को भारतीय संस्कृति और कर्तव्यों से जोड़ना
पर्यावरण संरक्षण
- जल, वन, स्वच्छता और संतुलित विकास का संरक्षण
नागरिक कर्तव्य
- अधिकारों के साथ कर्तव्यों का संतुलन
- कानून और राष्ट्रीय अनुशासन का सम्मान
स्वदेशी
- स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय उद्योगों का समर्थन
- आर्थिक आत्मनिर्भरता ही राष्ट्रीय शक्ति
III. शिक्षा और सांस्कृतिक विच्छेद
- दशकों तक सनातन धर्म और भारतीय ज्ञान-परंपराओं को हाशिये पर रखा गया
- पश्चिमी सांस्कृतिक वर्चस्व और इतिहास का विकृतिकरण
परिणाम: समाज, धर्म और राष्ट्र से कटी हुई पीढ़ी
👉 समाधान: भारतीय सभ्यतागत दृष्टि और सांस्कृतिक आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना।
IV. चयनात्मक सेकुलरिज़्म और तुष्टिकरण
- सेकुलरिज़्म का असमान प्रयोग—मुख्यतः हिंदुओं पर प्रतिबंध
- वोट-बैंक राजनीति से सामाजिक संतुलन कमजोर
👉 अब चुप्पी विकल्प नहीं है।
V. एकजुट हिंदू जनादेश की आवश्यकता
- जाति, भाषा और क्षेत्र से ऊपर हिंदू एकता
- वर्तमान राष्ट्रवादी, विकासोन्मुख शासन को राजनीतिक व सामाजिक समर्थन
क्योंकि विकास और सुरक्षा सक्रिय सामाजिक सहभागिता से ही संभव हैं।
VI. RSS की प्राथमिकताओं का पुनर्मुखीकरण
समय की मांग है कि RSS:
- सेवा + जागरण + संगठन + रणनीति का मॉडल अपनाए
- सरकार, धार्मिक नेतृत्व और हिंदू मंचों के साथ निकट सहयोग करे
- दुष्प्रचार का प्रतिरोध करे और समाज को मानसिक रूप से सशक्त बनाए
- कानूनी दायरे में आत्म-सुरक्षा की तैयारी सुनिश्चित करे
उद्देश्य:
- भारत को आंतरिक रूप से मजबूत बनाना, उसकी आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक शक्ति बढ़ाना, और उसे वैश्विक महाशक्ति व विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ाना
- RSS ने भारत को सेवा और संस्कार दिए हैं।
- आज आवश्यकता है जागरूकता, एकता, समन्वय और संगठित शक्ति की।
- मजबूत और सचेत व्यक्ति → परिवार → समाज → राष्ट्र
यही आज के भारत के लिए पंच परिवर्तन का आवश्यक विस्तार है।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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