सारांश
- दशकों तक उग्रवाद और आतंकवाद को उदारवाद, राजनीतिक शुद्धता या अल्पकालिक राजनीतिक हितों के नाम पर सहन, तर्कसंगत या चयनात्मक रूप से नियंत्रित किया गया।
- अब वह दौर समाप्त हो रहा है। यूरोप, पश्चिम, मध्य-पूर्व और एशिया में सरकारें कड़े कानून, सख्त क्रियान्वयन, आर्थिक दबाव, खुफिया सहयोग और कूटनीतिक अलगाव के माध्यम से आतंक के पूरे पारितंत्र को ध्वस्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
- इस वैश्विक बदलाव में भारत का एकीकृत मॉडल—सुरक्षा कार्रवाइयों, आर्थिक दबाव और कूटनीति का संयोजन—एक प्रभावी आदर्श के रूप में उभरता है, जो आतंकवाद की वित्तीय शिराओं, वैधता और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करता है।
उग्रवाद और आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक जागरण
1️⃣ वैश्विक मानसिकता में बदलाव: उग्रवाद से थकान
दुनिया अब निर्णायक मोड़ पर है।
- बार-बार के आतंकी हमलों और कट्टरपंथी बस्तियों ने तुष्टिकरण की विफलता उजागर की
- कानूनों का चयनात्मक प्रयोग उग्रवादी विचारधाराओं को बल देता रहा
- पहचान-आधारित राजनीति और वोट-बैंक ने राज्यों की दृढ़ता कमजोर की
- आतंकी नेटवर्क ने कानूनी छिद्रों, चैरिटीज़, एनजीओ और डिजिटल मंचों का दुरुपयोग किया
आज व्यापक रूप से स्वीकार किया जा चुका है:
- उग्रवाद को “मैनेज” नहीं किया जा सकता—उसे नष्ट करना होगा
- सहिष्णुता का अर्थ आत्मसमर्पण नहीं हो सकता
- सुरक्षा के बिना लोकतंत्र टिक नहीं सकता
2️⃣ यूरोप का जागरण: इनकार से सख्त प्रवर्तन तक
विभिन्न देशों में भारी कीमत चुकाने के बाद यूरोप ने ठोस कदम उठाए हैं:
🇫🇷 फ्रांस
- कट्टर इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध, उग्रवादी समूहों का विघटन
- चरमपंथी मस्जिदों/केंद्रों को बंद करना
- सख्त एंटी-सेपरेटिज़्म कानूनों का प्रवर्तन
- कट्टरपंथी विदेशी नागरिकों का निष्कासन
- धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा को गैर-समझौतावादी घोषित किया
🇩🇪 जर्मनी
- घरेलू खुफिया और निगरानी शक्तियों का विस्तार
- उग्रवादी फंडिंग पर सख्त कानून
- इस्लामवादी, वामपंथी और हिंसक वैचारिक नेटवर्क पर कार्रवाई
- महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा सुदृढ़
🇬🇧 यूनाइटेड किंगडम
- काउंटर-टेरर और डी-रैडिकलाइजेशन ढांचे मजबूत
- उग्रवादी संगठनों पर प्रतिबंध
- ऑनलाइन कट्टरता की कड़ी निगरानी
- “एक्टिविज़्म” की आड़ में नफरत फैलाने वालों पर कार्रवाई
🇪🇺 व्यापक यूरोप व ईयू स्तर
- ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, स्वीडन, नीदरलैंड्स में आव्रजन/शरण नियम सख्त
- निवास/नागरिकता को संवैधानिक मूल्यों और सार्वजनिक सुरक्षा से जोड़ा
- ईयू-स्तर पर खुफिया साझा-करण, फंडिंग नियंत्रण, संपत्ति जब्ती और प्रतिबंध तेज
मुख्य बदलाव: कानून ही नहीं, दृढ़ क्रियान्वयन।
3️⃣ यूरोप से आगे: वैश्विक समन्वय
- कड़ा रुख अब विश्वभर में दिखता है:
🇺🇸 संयुक्त राज्य अमेरिका
- उग्रवादी फंडिंग की सख्त जांच
- कट्टर संगठनों का नामांकन
- वीज़ा, सीमा और वित्तीय नियंत्रण कड़े
- विदेशी आतंकी फंडिंग पाइपलाइनों पर कार्रवाई
🇨🇦 कनाडा
- उग्रवादी संगठनों पर प्रतिबंध
- संपत्ति फ्रीज़ और फंडिंग कानून मजबूत
- चैरिटी/शरण ढांचों के दुरुपयोग पर रोक
🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया
- विश्व के कड़े काउंटर-टेरर कानूनों में से एक
- उग्रवादी प्रचार और पूर्व-नियोजित साजिश को अपराध बनाया
- खुफिया एजेंसियों को समय से पहले कार्रवाई का अधिकार
🇳🇿 न्यूज़ीलैंड
खुफिया निगरानी और वैचारिक उग्रवाद विरोधी कानून मजबूत
🇯🇵 जापान
- काउंटर-टेरर फंडिंग कानून सुदृढ़
- सीमा-पार उग्रवादी नेटवर्क पर निगरानी
- महत्वपूर्ण अवसंरचना सुरक्षा बढ़ी
मध्य-पूर्व
- कट्टरपंथी मौलवी नेटवर्क का विघटन
- फंडिंग चैनल बंद
- वैचारिक उकसावे को अपराध घोषित
🇮🇱 इज़राइल
- खुफिया-आधारित, पूर्व-निवारक कार्रवाई
- योजनाकारों, वित्तपोषकों और कमांड संरचनाओं को लक्ष्य
सार यही है:
- आतंकवाद धन, वैधता और सुरक्षित ठिकानों पर जीवित रहता है—इन्हें हटाइए, नेटवर्क ढह जाएगा।
4️⃣ भारत का एकीकृत मॉडल: दुनिया के लिए खाका
- इस वैश्विक बदलाव में भारत का दृष्टिकोण एक सशक्त आदर्श बनकर उभरता है।
भारत ने दिखाया कि आतंक-रोधी रणनीति केवल प्रतिक्रियात्मक सैन्य कार्रवाई नहीं है। रणनीतिक प्रतिक्रियाएँ—जिन्हें नीति-विमर्श में अक्सर ऑपरेशन सिंदूर-प्रकार की कार्रवाइयाँ कहा जाता है—बहु-आयामी सिद्धांत को दर्शाती हैं:
🔹 भारत के मॉडल के मुख्य तत्व
- पूरे आतंकी पारितंत्र को निशाना, केवल हमलावर नहीं
- सुरक्षा, खुफिया, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का समन्वय
- आतंक प्रायोजन की लागत बढ़ाना
- आर्थिक, व्यापारिक, नियामकीय और कूटनीतिक दबाव
- वैचारिक, लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायक तंत्रों का पर्दाफाश
पाकिस्तान से जुड़े आतंक-प्रायोजन नेटवर्क और बांग्लादेश व तुर्की से गुजरने वाले वैचारिक/वित्तीय मार्गों पर भारत का संतुलित दबाव दिखाता है कि आर्थिक युद्ध और कूटनीतिक अलगाव बिना अनियंत्रित escalation के आतंकी ढांचे को कमजोर कर सकते हैं।
मुख्य सीख:
- आतंकवाद केवल सुरक्षा समस्या नहीं—यह वित्तीय, वैचारिक और भू-राजनीतिक उद्यम है।
5️⃣ उग्रवाद के विरुद्ध समन्वित वैश्विक युद्ध
- भारत के अनुभव से वैश्विक स्तर पर आवश्यक कदम स्पष्ट होते हैं:
🌐 आवश्यक वैश्विक रणनीतियाँ
- आतंकी संगठनों, नेतृत्व, प्रशिक्षण केंद्रों और स्लीपर सेल्स का वैश्विक खाका
- फंडिंग चैनलों, चैरिटीज़, एनजीओ, शेल कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रीयल-टाइम खुफिया साझा-करण
आर्थिक युद्ध का समन्वय:
- प्रतिबंध
- संपत्ति जब्ती
- बैंकिंग व व्यापारिक नियंत्रण
- बार-बार अपराध करने वालों का कूटनीतिक-आर्थिक अलगाव
- वैचारिक समर्थकों और सहायताकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई
- ऑनलाइन प्रचार और कट्टरता नेटवर्क का विघटन
लक्ष्य है व्यवस्थित निष्क्रियकरण, अराजकता नहीं:
- धन के स्रोत काटना
- वैधता छीनना
- सुरक्षित ठिकाने खत्म करना
- भर्ती और लॉजिस्टिक्स ध्वस्त करना
6️⃣ उभरती वैश्विक सहमति
- दुनियाभर में साझा समझ बन रही है:
- उग्रवाद विखंडन और हिचकिचाहट में पनपता है
- आतंकी नेटवर्क कानूनी अंतराल और वित्तीय अपारदर्शिता का लाभ उठाते हैं
- सुरक्षा सहयोग के बिना लोकतंत्र सुरक्षित नहीं
भारत का मॉडल सिद्ध करता है:
- दृढ़ता = लापरवाही नहीं
- दबाव = घबराहट नहीं
- समन्वय = माफी नहीं
🔚 सभ्यतागत मोड़
- उग्रवाद और आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष अब नए और निर्णायक चरण में है।
जब:
- यूरोप का प्रवर्तन-आधारित जागरण
- पश्चिम की कानूनी-वित्तीय सख्ती
- इज़राइल की खुफिया-आधारित सटीकता
- और भारत की एकीकृत सुरक्षा-आर्थिक-कूटनीतिक रणनीति
एक साथ आते हैं—तो दुनिया के पास स्पष्ट खाका है: आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करना, उनकी फंडिंग काटना, समर्थकों को बेनकाब करना और मानवता को खतरा पहुंचाने की उनकी क्षमता को समाप्त करना।
- शांति के लिए शक्ति आवश्यक है।
- सहिष्णुता की सीमाएँ होती हैं।
- और वैश्विक सुरक्षा के लिए उद्देश्य की एकता अनिवार्य है।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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