आज दुनिया पर नज़र डालिए। राजनीतिक अराजकता, आर्थिक पतन, युद्ध, प्रॉक्सी संघर्ष और सामाजिक अशांति लगभग हर जगह दिखाई दे रही है।
- वेनेज़ुएला आर्थिक तबाही में फंसा है।
- नेपाल लगातार राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
- बांग्लादेश में अशांति और अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ रहे हैं।
- पाकिस्तान दिवालिया, कट्टरपंथी और बिखरा हुआ है।
- ईरान–इज़राइल तनाव क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ रहा है।
- यूक्रेन–रूस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा हिला दी है।
- यूरोप ध्रुवीकरण, अवैध प्रवासन और दंगों से परेशान है।
- अमेरिका स्वयं गहरे राजनीतिक विभाजन और संस्थागत संकट से गुजर रहा है।
हर महाद्वीप में अव्यवस्था अब सामान्य होती जा रही है।
- लेकिन इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है।
भारत अलग क्यों है?
भारत के सामने भी चुनौतियाँ हैं, लेकिन उसने:
- प्रणालीगत पतन
- बाहरी शक्तियों द्वारा रची गई अस्थिरता
- रणनीतिक संप्रभुता की हानि जैसी स्थितियों से खुद को बचाए रखा है।
यह स्थिरता महज एक संयोग नहीं है। पिछले 11 वर्षों में भारत को मिला है:
- राजनीतिक निरंतरता
- रणनीतिक स्पष्टता
- निर्णायक शासन
- ऐसा नेतृत्व जो राष्ट्रीय हित को बाहरी दबाव से ऊपर रखता है
इसके केंद्र में हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का सतत परिश्रम।
“टूलकिट” रणनीति और वैश्विक हस्तक्षेप
आधुनिक भू-राजनीति में सीधे युद्ध की जगह अब इस्तेमाल होता है:
- नैरेटिव वॉर
- आर्थिक दबाव
- राजनीतिक हस्तक्षेप
- आज्ञाकारी नेतृत्व को आगे बढ़ाना
यह तथाकथित “टूलकिट मॉडल” कई देशों में अराजकता और कमजोर सरकारों का कारण बना है।
- भारत को निशाना बनाया जाता है क्योंकि वह कमजोर नहीं, बल्कि उभरता हुआ राष्ट्र है।
भारत कैसे टिका रहा?
- मोदी के नेतृत्व में भारत ने:
- रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखी
- किसी भी सैन्य गुट का अंधानुकरण नहीं किया
- वैश्विक संबंधों में संतुलन रखा
- आतंकवाद और प्रतिबंधों पर दोहरे मानदंडों को चुनौती दी
- आंतरिक निर्णय प्रक्रिया की रक्षा की
आज का एक मजबूत और स्वतंत्र भारत पुरानी वैश्विक शक्ति-संरचना को चुनौती देता है।
नागरिकों की भूमिका
केवल मजबूत नेतृत्व पर्याप्त नहीं है। नागरिकों को चाहिए कि वे:
- भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को समझें
- नैरेटिव मैनिपुलेशन को पहचानें
- चयनात्मक विदेशी “चिंता” पर प्रश्न उठाएँ
- यह समझें कि अस्थिरता से किसे लाभ होता है
लोकतंत्र सबसे मजबूत तब होता है जब वह शोर की और ध्यान नहीं देता, बल्कि जागरूक रहता है।
- दुनिया अस्थिर है।
- नैरेटिव युद्ध वास्तविक हैं।
- शक्ति-संघर्ष जारी हैं।
भारत अब तक स्थिर रहा है क्योंकि उसके पास है:
- मजबूत नेतृत्व
- रणनीतिक स्वतंत्रता
- सभ्यतागत निरंतरता
हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम सजग, एकजुट और जागरूक रहें
- क्योंकि एक बार अराजकता घुस आई, तो पीढ़ियाँ लग जाती हैं स्थिरता लौटाने में।
भारत को यह सबक दूसरे देशों की तरह कठिन तरीके से नहीं सीखना चाहिए।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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