- आज बहुत से लोग सतही राष्ट्रवाद दिखाते हुए नेपाल, बांग्लादेश या श्रीलंका के उदाहरण देकर बहस करते हैं।
- लेकिन असली सवाल यह है— 2014 से पहले भारत रणनीतिक रूप से इतना कमजोर क्यों था?
2014 से पहले की वास्तविकता
उस दौर की राजनीति का केंद्र था:
- निजी और पारिवारिक सत्ता को बनाए रखना
- राष्ट्रहित से अधिक वोट-बैंक गणित
- मुस्लिम तुष्टीकरण को स्थायी नीति बनाना
- आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था और भ्रष्टाचार को विकास का मॉडल मानना
मजबूत और आत्मनिर्भर भारत उस राजनीति के लिए असुविधाजनक था।
इसीलिए राष्ट्रीय सुरक्षा और दीर्घकालिक रणनीति को नज़रअंदाज़ किया गया।
गोल्डन पर्ल: चीन की घेराबंदी और हमारी राजनीतिक उदासीनता
चीन की रत्नों की श्रंखला रणनीति, जिसे यहाँ गोल्डन पर्ल कहा गया है:
- हिंद महासागर में भारत को चारों ओर से घेरने की योजना थी
- दिखने में व्यापारिक, लेकिन असल में सैन्य और निगरानी अड्डों का जाल
इसके प्रमुख मोती:
- कोको आइलैंड (म्यांमार) – अंडमान से 58 किमी, चीन की निगरानी
- चिटगांव (बांग्लादेश) – बंगाल की खाड़ी में दबाव
- हंबनटोटा (श्रीलंका) – 99 साल की लीज पर चीन
- ग्वादर (पाकिस्तान) – CPEC और संभावित नेवल बेस
यह भारत के लिए खतरा था, लेकिन पिछली सरकारों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक रूप से सुविधाजनक, क्योंकि:
- आयात और रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार फलता रहा
- निर्भरता और अस्थिरता सत्ता की सुरक्षा बनी रही
2014 के बाद बदलाव: हीरा श्रंखला रणनीति
2014 में केवल सरकार नहीं, राजनीतिक प्राथमिकताएँ बदलीं:
- तुष्टीकरण की राजनीति छोड़ी गई
- राष्ट्रहित नीति का केंद्र बना
- सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर फोकस आया
हीरा श्रंखला रणनीति के प्रमुख स्तंभ:
- अंडमान-निकोबार – मलक्का स्ट्रेट के पास रणनीतिक दबाव
- सबांग पोर्ट (इंडोनेशिया) – मलक्का का दूसरा छोर
- चाबहार पोर्ट (ईरान) – ग्वादर का काउंटर
- दुक्म पोर्ट (ओमान) – अरब सागर में स्थायी उपस्थिति
साथ ही:
- QUAD और फ्रांस के साथ हिंद महासागर सहयोग ने भारत को इंडो-पैसिफिक में निर्णायक बनाया।
असली फर्क: तब और अब
तब:
- आयात + भ्रष्टाचार = सत्ता
- तुष्टीकरण = वोट
- कमजोर भारत = सुरक्षित राजनीति
अब:
- आत्मनिर्भरता = विकास
- राष्ट्रहित = नीति
- मजबूत भारत = वैश्विक सम्मान
Golden Pearl केवल चीन की रणनीति नहीं थी,
वह भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का प्रतिबिंब थी।
हीरा श्रंखला केवल समुद्री नीति नहीं, वह भारत की बदली हुई राष्ट्रीय चेतना का प्रमाण है।
आज भारत:
- केवल प्रतिक्रिया नहीं देता
- रणनीति बनाता है
- दिशा तय करता है
और Vishvguru बनने की ओर बढ़ रहा है।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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