हिंदू समाज के लिए जरूरी आत्ममंथन
By Sachcha Sanatani (PhD)
सामाजिक अकर्मण्यता और आर्थिक पराधीनता के मूल कारणों का निर्भीक और तार्किक विश्लेषण — यह पुस्तक हिंदू समाज को आत्ममंथन, पुरुषार्थ और ‘कर्ता भाव’ की ओर ले जाने का एक प्रामाणिक आह्वान है।
हिंदू समाज के लिए जरूरी आत्ममंथन
सामाजिक अकर्मण्यता और आर्थिक पराधीनता का सत्य
यह पुस्तक उन संस्थागत, वैचारिक और सांस्कृतिक बाधाओं की पहचान करती है जिन्होंने दशकों तक समाज को पुरुषार्थ और ‘कर्ता भाव’ से विमुख रखा। एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ यह ग्रंथ सामाजिक अकर्मण्यता, आर्थिक पराधीनता और आत्महीनता की जड़ों का तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत करता है और आत्ममंथन के माध्यम से आत्मनिर्भरता व आत्मगौरव का मार्ग दिखाता है।
(उन्नत पांडुलिपि — शीघ्र प्रकाशित होगी।)
