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Hindi

Showing 1-3 Of 6 Books

भारत का वर्तमान परिप्रेक्ष्य

By Sachcha Sanatani (PhD)

तुष्टिकरण और आत्ममुग्धता की राजनीति से सनातन जागरण और वैश्विक महाशक्ति तक — समकालीन भारत के रूपांतरण का एक विश्लेषणात्मक परिप्रेक्ष्य।

वैश्विक कुरुक्षेत्र

By Sachcha Sanatani (PhD)

जिहादी आतंकवाद, सामरिक लालच और परमाणु संकट के विरुद्ध सनातन दृष्टि — यह ग्रंथ दर्शाता है कि कैसे भारत सनातन सिद्धांतों को अपनाकर वैश्विक शांति और मानवता की रक्षा कर

सम्प्रभु भारत: गुलामी की मानसिकता से विश्वगुरु तक की यात्रा

By Sachcha Sanatani (PhD)

1947 के हस्तांतरण से 2047 के अमर काल तक — गुलामी की मानसिकता से विश्वगुरु तक की यात्रा का एक संपूर्ण, व्यावहारिक और विधिक ब्लूप्रिंट।

हिंदू समाज के लिए जरूरी आत्ममंथन

By Sachcha Sanatani (PhD)

सामाजिक अकर्मण्यता और आर्थिक पराधीनता के मूल कारणों का निर्भीक और तार्किक विश्लेषण — यह पुस्तक हिंदू समाज को आत्ममंथन, पुरुषार्थ और ‘कर्ता भाव’ की ओर ले जाने का एक

व्यावहारिक सनातन धर्म

By Sachcha Sanatani (PhD)

व्यावहारिक सनातन धर्म आधुनिक जीवन की चुनौतियों और सनातन ज्ञान के शाश्वत सिद्धांतों के बीच एक व्यावहारिक सेतु है। यह पुस्तक उपनिषदों, भगवद्गीता और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के मूल सिद्धांतों

सफलता मिली फिर भी मन अशांत क्यों है?

By Sachcha Sanatani (PhD)

क्या सफलता ही सुख का अंतिम सूत्र है? यदि हाँ, तो जीवन के हर लक्ष्य को प्राप्त कर लेने के बाद भी मन में खालीपन, तनाव और अधूरापन क्यों बना

We have undertaken a focused initiative to raise awareness among Hindus regarding the challenges currently confronting us as a community, our Hindu religion, and our Hindu nation, and to deeply understand the potential consequences of these issues. Through this awareness, Hindus will come to realize the underlying causes of these problems, identify the factors and entities contributing to them, and explore the solutions available. Equally essential, they will learn the critical role they can play in actively addressing these challenges

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