सम्प्रभु भारत: गुलामी की मानसिकता से विश्वगुरु तक की यात्रा
By Sachcha Sanatani (PhD)
1947 के हस्तांतरण से 2047 के अमर काल तक — गुलामी की मानसिकता से विश्वगुरु तक की यात्रा का एक संपूर्ण, व्यावहारिक और विधिक ब्लूप्रिंट।
सम्प्रभु भारत: गुलामी की मानसिकता से विश्वगुरु तक की यात्रा
2047 तक वैश्विक महाशक्ति बनाने का रणनीतिक आलेख
क्या हम वाकई स्वतंत्र हैं, या केवल हमारा भूगोल स्वतंत्र हुआ है?
1947 में हमें जो आज़ादी मिली, वह एक खंडित भूगोल, उधार लिया हुआ ब्रिटिश प्रशासनिक ढांचा और वैचारिक कोहरा लेकर आई थी। शरीर से हम आज़ाद हो गए, परंतु मानसिक और बौद्धिक रूप से ‘गुलामी की मानसिकता’ का जाल हमारी चेतना पर थोप दिया गया।
यह पुस्तक अतीत की लाचारियों का रुदन नहीं है। यह 2014 से लेकर 2047 के अमर काल तक भारत के एक तकनीकी, सैन्य, राजकोषीय और आर्थिक महाशक्ति बनने का एक संपूर्ण, व्यावहारिक और विधिक ब्लूप्रिंट है। इसके सात भाग और 36 अध्याय पाठक को औपनिवेशिक हीनभावना के चक्रव्यूह से मुक्त कर राष्ट्र-प्रथम के सनातनी ‘कर्ता भाव’ से जोड़ते हैं।
(उन्नत पांडुलिपि — शीघ्र प्रकाशित होगी।)
