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सफलता मिली फिर भी मन अशांत क्यों है?

By Dr. Hemant Kumar Jajoo

व्यावहारिक सनातन धर्म आधुनिक जीवन की चुनौतियों और सनातन ज्ञान के शाश्वत सिद्धांतों के बीच एक व्यावहारिक सेतु है। यह पुस्तक उपनिषदों, भगवद्गीता और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के मूल सिद्धांतों को आधुनिक विज्ञान, न्यूरोसाइंस, न्यूरोप्लास्टिसिटी तथा अवचेतन मन के दृष्टिकोण से समझाती है।

यह कोई पारंपरिक धार्मिक पुस्तक नहीं है, बल्कि जीवन में मानसिक स्पष्टता, आंतरिक संतुलन और स्थायी शांति प्राप्त करने का एक तार्किक एवं व्यावहारिक मार्गदर्शक है। प्रत्येक अध्याय में आत्म-मंथन और व्यवहारिक अभ्यास दिए गए हैं, जो पाठकों को केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन में वास्तविक परिवर्तन का अनुभव कराते हैं।

संसार के मेले में भटकाव से शाश्वत शांति तक

आज का मनुष्य अभूतपूर्व सुविधाओं, तकनीकी प्रगति और भौतिक उपलब्धियों के युग में जी रहा है, फिर भी उसके भीतर तनाव, असंतोष और मानसिक अशांति बढ़ती जा रही है। आखिर ऐसा क्यों है?

‘व्यावहारिक सनातन धर्म’ इसी प्रश्न की खोज है। यह पुस्तक सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों को आधुनिक विज्ञान और तार्किक चिंतन के साथ जोड़ते हुए जीवन को समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

पुस्तक की विशेषताएँ

अध्यात्म और न्यूरोसाइंस

उपनिषदों और भगवद्गीता के सिद्धांतों को न्यूरोप्लास्टिसिटी और अवचेतन मन के आधुनिक विज्ञान से जोड़कर समझाया गया है।

कर्म का गणित

भाग्य, कर्म और नीयत के बीच के संबंध का व्यावहारिक एवं तार्किक विश्लेषण।

भटकाव से शांति तक

जीवन की उलझनों, मानसिक संघर्षों और आंतरिक अशांति से बाहर निकलने का स्पष्ट मार्ग।

आत्म-परिवर्तन के अभ्यास

प्रत्येक अध्याय के अंत में आत्म-मंथन, चिंतन और व्यवहारिक संकल्प दिए गए हैं।

यह पुस्तक किनके लिए है?

• आधुनिक पेशेवरों और युवाओं के लिए
• मानसिक शांति की तलाश करने वालों के लिए
• अध्यात्म को तर्क और विज्ञान के माध्यम से समझने वालों के लिए
• जीवन में उद्देश्य, संतुलन और स्पष्टता खोजने वालों के लिए

लेखक का संदेश

“जब तक आप अपने भीतर के ‘दीमक’ अर्थात आंतरिक कलह को शांत नहीं करते, तब तक बाहर का कोई भी वटवृक्ष आपको वास्तविक शांति नहीं दे सकता।”

Availability

upcoming

Contributors

Dr. Hemant Kumar Jajoo (PhD)

Format

Paperback

Country

India

Language

Hindi

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