सारांश:
- यह विस्तृत रणनीतिक आलेख स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती सात दशकों के तुष्टिकरण मॉडल, आंतरिक सुरक्षा तंत्र के आधुनिकीकरण और राष्ट्रविरोधी ताकतों के समूल विनाश के लिए चाणक्य नीति एवं कृष्ण नीति के व्यावहारिक अनुप्रयोग का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
- सितंबर 2022 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, गृह मंत्रालय (MHA), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और खुफिया एजेंसियों द्वारा संचालित ‘ऑपरेशन मिडनाइट‘ ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के आतंकी व कट्टरपंथी नेटवर्क को ज़मीनी स्तर (Grassroots Level) पर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
- यह आलेख रेखांकित करता है कि सरकारी और सुरक्षा तंत्र की कानूनी कार्रवाइयों को पूर्ण सफल बनाने के लिए देश के प्रत्येक देशभक्त नागरिक को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर राष्ट्रविरोधी तत्वों की पहचान कर उनका पूर्ण बहिष्कार करना होगा।
‘ऑपरेशन मिडनाइट’: चाणक्य-कृष्ण नीति और नागरिक कर्तव्य
1. सात दशकों का तुष्टिकरण तंत्र बनाम वर्तमान की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति
स्वतंत्रता के शुरुआती सात दशकों के दौरान भारत के प्रशासनिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक गंभीर विषमता बनी रही, जिसने देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को गहरा नुकसान पहुँचाया।
- ईमानदार व देशभक्त नागरिकों की उपेक्षा: दशकों तक कानून का पालन करने वाले, करदाता और राष्ट्रभक्त नागरिकों को प्रशासनिक व राजनीतिक व्यवस्था में हाशिए पर धकेला गया। उनकी सुरक्षा, स्वाभिमान और सांस्कृतिक पहचान को नजरअंदाज किया गया।
- राष्ट्रविरोधी व असामाजिक तत्वों का पोषण: तत्कालीन राजनीतिक इकोसिस्टम ने सत्ता में बने रहने, वित्तीय लाभ और वोट-बैंक के संकीर्ण स्वार्थ में कट्टरपंथी, अलगाववादी, असामाजिक और आपराधिक तत्वों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष संरक्षण प्रदान किया।
- संरक्षण तंत्र की छटपटाहट: वर्तमान में जब केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अपराधियों व राष्ट्रविरोधियों के नेटवर्क को ध्वस्त कर रही हैं, तब यह पूरा पारिस्थितिकी तंत्र अपनी खोई हुई शक्ति को पुनः पाने के लिए अत्यधिक बेचैन और छटपटा रहा है।
- सुरक्षा प्राथमिकताओं में युगांतरकारी बदलाव: आज भारत की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को राजनीतिक समझौतों से पूरी तरह मुक्त कर केवल राष्ट्रीय संप्रभुता और नागरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रबंधित किया जा रहा है।
2. चाणक्य-कृष्ण नीति का पुनर्जागरण: राष्ट्र व सनातन धर्म की सुरक्षा का आधार
राष्ट्र और सनातन संस्कृति की रक्षा केवल रक्षात्मक रवैये से संभव नहीं है। इसके लिए प्राचीन भारतीय राज्यशास्त्र और सामरिक नीतियों का कठोरता से पालन अनिवार्य है।
- चाणक्य नीति का अनुप्रयोग: आचार्य चाणक्य का निर्विवाद सिद्धांत है कि राष्ट्र के शत्रुओं और विषैले तत्वों का आंशिक नहीं, बल्कि समूल विनाश ही स्थायी शांति की एकमात्र गारंटी है। शत्रुओं को पनपने का अवसर देना राष्ट्र-निर्माण में सबसे बड़ी बाधा है।
- धर्म रक्षा हेतु कृष्ण नीति: भगवान श्री कृष्ण का दर्शन सिखाता है कि धर्म, राष्ट्र, सत्य और सज्जनों की रक्षा के लिए अधर्म, आसुरी शक्तियों और समाज-विरोधी तत्वों का दमन करना ही सर्वोपरि धर्म है। इसके लिए साम, दाम, दंड और भेद का न्यायसंगत उपयोग अनिवार्य है।
- आधुनिक राज्यशास्त्र से जुड़ाव: आज का आंतरिक सुरक्षा मॉडल चाणक्य की कूटनीतिक गुप्तता और कृष्ण नीति की निर्णायकता का उत्तम सम्मिश्रण है, जो कानून के दायरे में रहते हुए चरमपंथ को जड़ से उखाड़ने का काम कर रहा है।
- सनातन मूल्यों का संरक्षण: इस कूटनीतिक व सामरिक कड़ाई का अंतिम उद्देश्य भारत की बहुसांस्कृतिक, सनातन और नागरिक जीवन-शैली को हिंसक कट्टरवाद से सुरक्षित रखना है।
3. ‘ऑपरेशन मिडनाइट’: 20 दिनों का गुप्त और अचूक सामरिक रोडमैप
22 सितंबर 2022 की तड़के 3:30 बजे PFI के खिलाफ शुरू हुआ राष्ट्रव्यापी ऑपरेशन भारतीय खुफिया और प्रशासनिक इतिहास का एक स्वर्ण अध्याय है।
- उच्चस्तरीय गोपनीय योजना: अगस्त 2022 के अंत में गृह मंत्री अमित शाह, NSA अजीत डोभाल, IB, RAW, NIA और ED प्रमुखों की मैराथन बैठकों में 20 दिनों का अत्यंत गोपनीय रोडमैप तैयार किया गया, जिसमें प्रत्येक एजेंसी को स्पष्ट ‘Actionable Items’ दिए गए।
- केरल राजभवन में निर्णायक समन्वय: प्रधानमंत्री द्वारा INS विक्रांत के राष्ट्र को समर्पण के तुरंत बाद, NSA अजीत डोभाल ने केरल राजभवन में राज्य के शीर्ष पुलिस (DGP) व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ गोपनीय बैठक कर संवेदनशील राज्यों में ज़मीनी रणनीति तय की।
- केंद्रीय कमांड और नियंत्रण तंत्र: गृह मंत्रालय में एक केंद्रीय कमांड सेंटर तथा 6 प्रमुख शहरों में अत्याधुनिक कंट्रोल रूम बनाए गए। 250 से अधिक शीर्ष अधिकारियों और हजारों CAPF व स्थानीय पुलिस बल के समन्वय के लिए 4 IG, 1 ADG और 16 SP तैनात किए गए।
- अचूक ‘Go-Ahead’ और पूर्ण गोपनीयता: 15 से अधिक राज्यों के 90 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी के बावजूद सूचना की एक बूंद लीक नहीं हुई। 3:30 बजे आदेश मिलते ही PFI के शीर्ष नेतृत्व को उस समय दबोचा गया जब वे गहरी नींद में सो रहे थे।
4. ज़मीनी स्तर पर चरमपंथी नेटवर्क और वित्तीय स्रोतों का उन्मूलन
कट्टरपंथी और उग्रवादी संगठनों को केवल कागजों पर प्रतिबंधित (Ban) कर देना पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि वे नए नामों और मुखौटा संस्थाओं के माध्यम से पुनर्जीवित हो जाते हैं।
- मुखौटा संस्थाओं का पर्दाफाश: PFI द्वारा समाज सेवा, छात्र राजनीति, महिला अधिकारों और कानूनी सहायता के नाम पर खड़े किए गए मुखौटा संगठनों (जैसे SDPI, CFI, NWF, AIIC, RIF आदि) के जाल को एजेंसियों ने पूरी तरह बेनकाब किया।
- शीर्ष नेतृत्व और विचारकों की गिरफ्तारी: केवल निचले कैडर या कार्यकर्ताओं को पकड़ने के बजाय संगठन के मुख्य विचारकों, नीतिकारों और वित्तीय नियंत्रकों को जेल भेजा गया, जिससे उनका कैडर रातों-रात दिशाहीन हो गया।
- वित्तीय तंत्र (Money Trail) पर प्रहार: ED द्वारा जुटाए गए विदेशी फंडिंग, हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के ठोस साक्ष्यों ने संगठन की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी।
- उच्च दोषसिद्धि दर (High Conviction Rate): NIA के 93% से अधिक के कन्विक्शन रेट और सघन जांच के चलते इन गिरफ्तार तत्वों का कानून के शिकंजे से बचना लगभग असंभव है।
5. आम नागरिकों का परम कर्तव्य: सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बहिष्कार
सुरक्षा एजेंसियां कानूनी और पुलिसिया स्तर पर राष्ट्रविरोधियों को सलाखों के पीछे भेज सकती हैं, लेकिन इस इकोसिस्टम को पूरी तरह नष्ट करने के लिए प्रत्येक देशभक्त नागरिक का सक्रिय सहयोग आवश्यक है।
- पहचान और नागरिक सतर्कता (Identification & Vigilance): अपने आसपास, कार्यस्थल, शैक्षणिक संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रविरोधी, अलगाववादी या नफरत फैलाने वाले तत्वों को पहचानना और उनकी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना एजेंसियों को देना हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है।
- सामाजिक और सांस्कृतिक बहिष्कार: देश की संप्रभुता, सेना, संविधान और सांस्कृतिक प्रतीकों का अपमान करने वाले तत्वों को किसी भी सामाजिक मंच या सामुदायिक कार्यक्रम में कोई स्थान या प्रतिष्ठा नहीं दी जानी चाहिए।
- आर्थिक बहिष्कार (Economic Boycott): राष्ट्रविरोधी गतिविधियों या चरमपंथी विचारधारा को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से वित्तपोषित करने वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, प्रायोजकों और संस्थाओं का आर्थिक रूप से पूर्ण बहिष्कार करना आवश्यक है। वित्तीय आधार खत्म होते ही राष्ट्रविरोधी नेटवर्क ढह जाते हैं।
- राजनीतिक जागरूकता और एकजुटता: चुनावों के दौरान राजनीतिक लाभ के लिए चरमपंथ को बढ़ावा देने वाले या राष्ट्रविरोधी तत्वों का तुष्टिकरण करने वाले राजनीतिक गठजोड़ को एकतरफा नकारना नागरिक परिपक्वता का प्रमाण है।
6. निष्कर्ष: एक जाग्रत और सुरक्षित भारत का संकल्प
- स्वतंत्रता के शुरुआती दशकों के उस हानिकारक तुष्टिकरण युग का अब अंत हो चुका है। ‘ऑपरेशन मिडनाइट’ केवल एक रेड या कानूनी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह आधुनिक भारत के प्रशासनिक सामर्थ्य, चाणक्य नीति और कृष्ण नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष प्रमाण थी।
- जब देश का सुरक्षा तंत्र और 140 करोड़ देशभक्त नागरिक एक साथ मिलकर राष्ट्रविरोधी तत्वों का सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक बहिष्कार करेंगे, तब भारत की आंतरिक सुरक्षा, सनातन परंपरा और राष्ट्र की संप्रभुता हमेशा के लिए अक्षुण्ण रहेगी।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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1 Comment
Eugenedal
It is a pity, that now I can not express – there is no free time. I will be released – I will necessarily express the opinion.
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