सारांश
- यह आलेख इस कड़वी और अकाट्य सच्चाई को गहराई से रेखांकित करता है कि देश विरोधी ताकतों और अराजक इकोसिस्टम को सबसे बड़ा दर्द और मातम इस बात का है कि देश की पुलिस, प्रशासन और कानून-व्यवस्था ने उनके नापाक मंसूबों पर पूरी तरह पानी फेर दिया।
- आज़ादी के बाद के सात लंबे दशकों तक ‘सेक्युलारिज्म’ और तुष्टीकरण के नाम पर देश को जमकर लूटने और ‘फ्री की मलाई’ खाने वाले लोग आज सत्ता से बाहर हैं और उनकी लूट व भ्रष्टाचार की दुकानें पूरी तरह बंद हो चुकी हैं।
- इसी गहरी बौखलाहट और खीझ में वे विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों की आड़ में आगजनी, हिंसा और देश को अशांत करने की साजिशें रचते हैं, लेकिन मुस्तैद पुलिस बल और राष्ट्रभक्त जनता उनकी हर चाल को नाकाम कर देती है।
- आज का जागरूक भारतीय नागरिक भली-भांति समझ चुका है कि इन गद्दारों का एकमात्र उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाना है, ताकि वे अपने घोटालों और लूटमार के पुराने काले दिन वापस ला सकें।
- यह लेख उन तमाम आंतरिक और बाहरी षड्यंत्रों का कच्चा-चिट्ठा खोलता है और राष्ट्रहित में एकजुट रहने का आह्वान करता है।
देश में हिंसा फैलाने की कोशिशों पर पुलिस की सख्त कार्रवाई
1. गद्दारों को सबसे बड़ा दर्द: पुलिस ने देश क्यों नहीं जलने दिया?
जब-जब देश में शांति, सद्भाव और विकास का अभूतपूर्व माहौल बनता है, तब-तब देश के भीतर बैठे कुछ गद्दार, उपद्रवी और अराजक तत्व देश को अस्थिर करने के लिए सक्रिय हो जाते हैं।
- अराजकता और हिंसा फैलाने की सुनियोजित साजिशें: इन राष्ट्र-विरोधी तत्वों का मुख्य और एकमात्र उद्देश्य देश में दंगे भड़काना, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाना और आगजनी के जरिए देश में अराजकता का माहौल पैदा करना होता है। वे कभी भी शांतिपूर्ण सहअस्तित्व में विश्वास नहीं रखते।
- पुलिस की मुस्तैदी से टूटे हौसले: इन उपद्रवियों और गद्दारों को आज इस बात की सबसे बड़ी पीड़ा और निराशा है कि देश की पुलिस, सुरक्षा बलों और प्रशासनिक तंत्र ने समय रहते अत्यंत सख्त और निर्णायक कार्रवाई की। पुलिस ने उन्हें देश को जलाने, दंगे कराने या देश की शांति को भंग करने का कोई अवसर नहीं दिया।
- हिंसा के बल पर अपनी सियासी रोटियां सेकना: जब लोकतांत्रिक और चुनावी मंच पर ये लोग जनता का समर्थन हासिल करने में बुरी तरह विफल हो जाते हैं, तब ये हिंसा, उपद्रव और सड़कछाप अराजकता को अपना मुख्य हथियार बनाते हैं। गद्दारों को इसी बात का दुख है कि पुलिस की मुस्तैदी ने उनके इन खूनी और देशविरोधी इरादों को जमीन पर ही कुचल दिया।
2. सात दशकों की खुली लूट और ‘फ्री की मलाई’ का अंत
इस पूरी बौखलाहट, छटपटाहट और देश-विरोधी षड्यंत्रों की असली जड़ें देश के पिछले राजनीतिक इतिहास और दशकों पुरानी व्यवस्थाओं में गहराई से जुड़ी हुई हैं।
- सेक्युलारिज्म की आड़ में राष्ट्रद्रोह का खेल: शुरुआती सात दशकों तक एक विशेष राजनीतिक और वैचारिक इकोसिस्टम ने ‘धर्मनिरपेक्षता’ और तुष्टीकरण का मुखौटा पहनकर देश को अंदर से खोखला किया। समाज को जातियों, क्षेत्रों और धर्मों में बाँटकर देश के संसाधनों की खुली लूट की गई और मलाई काटी गई।
- भ्रष्टाचार और घोटालों के अड्डों पर स्थायी ताला: 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आए पारदर्शी, ईमानदार और ‘राष्ट्र-प्रथम’ (Nation First) की सोच वाले शासन ने इन सभी भ्रष्ट तंत्रों, दलालों के गठजोड़ और घोटालों की दुकानों पर स्थायी ताला लगा दिया है। अब बिचौलियों के लिए चोरी के रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं।
- लूटमार के पुराने दिनों की वापसी की छटपटाहट: आज जब उन भ्रष्टाचारियों की अवैध कमाई, कमीशनखोरी और ‘फ्री की मलाई’ पूरी तरह बंद हो चुकी है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक चुकी है। वे किसी भी कीमत पर, किसी भी हद तक जाकर मोदी जी को सत्ता से बेदखल करना चाहते हैं, ताकि वे अपनी लूट की पुरानी दुकानें और भ्रष्टाचार के अड्डे फिर से आबाद कर सकें।
3. झूठे नैरेटिव, टूलकिट और विदेशी प्रोपोगंडा का पर्दाफाश
सत्ता और लूट की मलाई से बेदखल हो चुका यह इकोसिस्टम अपनी खीझ मिटाने के लिए लगातार सबसे निचले स्तर के हथकंडे अपना रहा है।
- देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने का षड्यंत्र: बाहरी ताकतों और विदेशी मंचों के साथ मिलकर झूठे नैरेटिव गढ़ना, विदेशी धरती से भारत की लोकतांत्रिक छवि को धूमिल करना और भारत-विरोधी टूलकिट चलाना इनका रोजमर्रा का एजेंडा बन चुका है।
- भारत की तेज विकास रफ्तार से गहरी जलन: भारत जिस तीव्र गति से अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा निर्माण, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और आर्थिक मोर्चे पर दुनिया में नंबर एक बनने की ओर अग्रसर है, उससे इन गद्दारों की रातों की नींद उड़ी हुई है। वे देश की इस ऐतिहासिक प्रगति को पचा नहीं पा रहे हैं।
- नागरिकों की अटूट सजगता और समझ: देश का आम नागरिक अब इनकी किसी भी चाल, फरेब और प्रोपोगंडा के बहकावे में आने वाला नहीं है। जनता अच्छी तरह जानती है कि देश को मजबूत बनाने और इसे वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए एक दृढ़, ईमानदार और राष्ट्रभक्त सरकार का होना कितना अनिवार्य है।
4. नए भारत का संकल्प: राष्ट्रवाद और सुशासन की अटूट दीवार
आज का भारत 2014 से पहले का लाचार भारत नहीं है; देश की 140 करोड़ जनता ने सुशासन, सुरक्षा और राष्ट्रवाद के वास्तविक और गौरवशाली अर्थ को भली-भांति समझ लिया है।
- जीरो टॉलरेंस की नीति: देश की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में आज सरकार की नीति ‘शून्य-सहनशीलता’ (Zero Tolerance) की है। राष्ट्रविरोधी तत्वों और देश को नुकसान पहुँचाने की सोचने वालों के लिए नए भारत में कोई नरमी नहीं बरती जाती।
- राष्ट्रहित सर्वोपरि का भाव: देश का युवा, किसान, महिला और हर वर्ग आज जाति-धर्म की संकीर्ण दीवारों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मान रहा है। जनता जानती है कि देश सुरक्षित रहेगा तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।
- विश्वगुरु बनने की अजेय यात्रा: देश के नागरिक प्रधानमंत्री मोदी के ओजस्वी नेतृत्व में भारत को आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक रूप से एक वैश्विक महाशक्ति और विश्वगुरु बनाने के संकल्प के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं।
निष्कर्ष
- गद्दारों की यह निरंतर छटपटाहट, उनका विलाप और उनकी बौखलाहट इस बात का सबसे बड़ा और अकाट्य प्रमाण है कि देश पूरी तरह सही दिशा में और मजबूत कदमों के साथ आगे बढ़ रहा है।
- पुलिस की सख्ती, प्रशासनिक मुस्तैदी और कानून के कड़े पहरे ने यह साबित कर दिया है कि नए भारत में अराजकता, आगजनी और देशविरोधी गतिविधियों के लिए कोई गुंजाइश नहीं है।
- देश की शांति, सुरक्षा, अखंडता और समृद्धि हमारे लिए सर्वोपरि है। हम सभी देशवासियों को मिलकर इन राष्ट्र-विरोधी ताकतों और उनके गंदे इकोसिस्टम के हर षड्यंत्र को नाकाम करना होगा।
- आइए, पूरी दृढ़ता के साथ अपने यशस्वी और राष्ट्रभक्त नेतृत्व के पीछे चट्टान की तरह खड़े रहें ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ एक सुरक्षित, स्वाभिमानी और शक्तिशाली भारत में सांस ले सकें।
सोचें, मूल्यांकन करें, सतर्क रहें और देश को सर्वोपरि रखें।
🇮🇳जय भारत, वन्देमातरम 🇮
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