सारांश
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की राष्ट्रीय नीति में एक ऐतिहासिक और संरचनात्मक बदलाव आया है। देश अब केवल रक्षात्मक या प्रतिक्रियात्मक रवैया अपनाने के बजाय सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy), संस्थागत आधुनिकीकरण, चरमपंथ के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता (Zero-Tolerance) और सभ्यतागत पहचान के पुनर्जागरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
- वैश्विक मंच पर भारत ने पश्चिमी प्रतिबंधों और डॉलर की अनिश्चितता के बीच विशेष रुपया वोस्ट्रो खाता प्रणाली (Special Rupee Vostro Account Mechanism) के माध्यम से ‘दे-डॉलराइजेशन’ का नया मॉडल पेश किया है। रूस, बांग्लादेश और भूटान जैसे देशों के साथ त्रिकोणीय व्यापार निपटान के जरिए भारत अपनी आर्थिक संप्रभुता को सुरक्षित कर रहा है।
- आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में गृह मंत्रालय द्वारा फरवरी 2026 में जारी देश की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति ‘प्रहार‘ (PRAHAAR) के तहत आतंकवाद, डिजिटल चरमपंथ और उग्रवादी नेटवर्क के पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा है।
- साथ ही, भारतीय न्याय संहिता जैसे नए कानूनों, अनुच्छेद 370 के उन्मूलन और काशी, उज्जैन व अयोध्या जैसे सांस्कृतिक गलियारों के जीर्णोद्धार के माध्यम से भारत अपने प्रशासनिक, कानूनी और सभ्यतागत ढांचे को मजबूत कर रहा है।
- यह सिद्धांत यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और भू-राजनीतिक मंच पर एक दर्शक नहीं, बल्कि एक प्रमुख एजेंडा-सेटर बन चुका है।
भारत का नया सामरिक दृष्टिकोण
1. भू-आर्थिक इंजीनियरिंग और वित्तीय संप्रभुता (Geoeconomic Engineering)
- विशेष वोस्ट्रो खाता प्रणाली (SRVA): जुलाई 2022 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू किया गया विशेष रुपया वोस्ट्रो खाता तंत्र पश्चिमी पाबंदियों से पूरी तरह सुरक्षित है। जब रूस पर SWIFT से प्रतिबंध लगाए गए, तो इस प्रणाली ने विदेशी बैंकों को भारतीय बैंकों में रुपये में खाते खोलने और व्यापार करने की अनुमति दी।
- त्रिकोणीय व्यापार और ऋण निपटान का मॉडल: रूस द्वारा भारत से कच्चे तेल के बड़े पैमाने पर आयात के कारण भारतीय बैंकों के वोस्ट्रो खातों में अरबों रुपये का सरप्लस जमा हुआ। रूस इसी जमा रुपये को बांग्लादेश के खातों में स्थानांतरित कर रहा है, जिससे बांग्लादेश $12 अरब के रूपपुर परमाणु बिजलीघर (Rooppur NPP) के कर्ज की किस्तों का भुगतान कर रहा है।
- व्यापार घाटे और फॉरेक्स रिजर्व का संतुलन: इस व्यवस्था के जरिए बांग्लादेश भारत से होने वाले अपने $8 अरब के आयात घाटे को बिना अमेरिकी डॉलर खर्च किए रुपये में संतुलित कर रहा है। इससे बांग्लादेश और भूटान जैसे पड़ोसियों के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो रहा है।
- पश्चिमी प्रतिबंधों से सुरक्षा: यह पूरा लेनदेन भारत की घरेलू बैंकिंग प्रणाली और राष्ट्रीय क्लीयरिंग हाउस के भीतर होता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व या यूरोपीय बैंकिंग नेटवर्क का हस्तक्षेप न होने के कारण यह तंत्र पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रहता है।
2. भौतिक व सैन्य निवारण: सीमा सुरक्षा और रक्षा आत्मनिर्भरता
- एकीकृत थिएटर कमान और सीडीएस (CDS): चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के पद के गठन का मुख्य उद्देश्य थलसेना, नौसेना और वायुसेना को एकीकृत थिएटर कमानों में संगठित करना है, ताकि किसी भी उच्च-तीव्रता वाले संघर्ष के दौरान त्वरित और एकीकृत सैन्य कार्रवाई की जा सके।
- वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम (VVP): सीमाओं को अविकसित रखने की पुरानी नीतियों को बदलते हुए, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास स्थित सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचे, डिजिटल कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ये गांव अब निगरानी और अग्रिम क्षेत्रीय सुरक्षा के प्राथमिक केंद्र के रूप में कार्य करते हैं।
- रक्षा आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat): विदेशी सैन्य आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सैकड़ों रक्षा प्रणालियों के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया है। स्वदेशी विमानवाहक पोत (INS विक्रांत), तेजस लड़ाकू विमान और ATAGS जैसी उन्नत तोपखानों का घरेलू निर्माण किया जा रहा है।
- हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा (SAGAR): ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) पहल के तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक प्रमुख समुद्री सुरक्षा प्रदाता के रूप में उभरा है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
3. आंतरिक सुरक्षा ढांचा: ‘प्रहार’ (PRAHAAR) नीति और चरमपंथ का उन्मूलन
- राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति ‘प्रहार‘: फरवरी 2026 में गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति ‘प्रहार‘ (PRAHAAR) को लागू किया गया। यह नीति एक सात-स्तंभों वाले ढांचे पर आधारित है, जो खुफिया जानकारी आधारित निवारण और त्वरित प्रतिक्रिया पर बल देती है।
- बहु-एजेंसी खुफिया समन्वय: मल्टी-एजेंसी सेंटर (MAC) और इंटेलिजेंस ब्यूरो के तहत जॉइंट टास्क फोर्स ऑन इंटेलिजेंस (JTFI) के माध्यम से राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच वास्तविक समय (Real-Time) में खुफिया जानकारी साझा की जा रही है।
- चरमपंथी संगठनों का समूल विनाश: गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उससे जुड़े कट्टरपंथी मॉड्यूलों पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाया गया है। इसका उद्देश्य खिलाफत संबंधी विचारधाराओं और अलगाववादी नेटवर्कों के पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह उखाड़ फेंकना है।
- डिजिटल और वित्तीय नकेल: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) क्रिप्टो-वॉलेट ट्रैकिंग, डार्क-वेब क्राउडसोर्सिंग और ऑनलाइन कट्टरपंथ फैलाने वाले सोशल मीडिया नेटवर्कों की निगरानी कर वित्तीय व डिजिटल फंडिंग चैनलों को ब्लॉक कर रहे हैं।
- समुदाय-आधारित काउंटर-रेडिकलाइजेशन: ‘प्रहार’ नीति के तहत उग्रवाद की ओर आकर्षित होने वाले युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए लक्षित पुलिस हस्तक्षेप, सामुदायिक नेताओं, गैर-सरकारी संगठनों और सुधार कार्यक्रमों की मदद से सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है।
4. कानूनी सुधार, प्रशासनिक एकीकरण और सभ्यतागत पुनर्जागरण
- जम्मू और कश्मीर का प्रशासनिक एकीकरण: अनुच्छेद 370 के उन्मूलन ने दशकों से चले आ रहे विशेष संवैधानिक दर्जे और राजनीतिक अलगाववाद के ढांचे को समाप्त कर दिया। इसके बाद क्षेत्र को भारत के मुख्य प्रशासनिक व कानूनी तंत्र से पूरी तरह जोड़कर आर्थिक विकास और सुरक्षा को गति दी गई है।
- उपनिवेशवाद-मुक्त कानूनी ढांचा: औपनिवेशिक काल के भारतीय दंड विधान (IPC) को हटाकर ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) जैसे आधुनिक कानूनी ढांचों को लागू किया गया है। ये कानून राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा, आतंकवाद से जुड़े अपराधों पर सख्त कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रियाओं में उच्च सजा दर (High Conviction Rate) सुनिश्चित करते हैं।
- सांस्कृतिक गलियारों का पुनरुद्धार: राज्य द्वारा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, उज्जैन के महाकाल लोक और अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर जैसे विशाल सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों का पुनरुद्धार किया गया है। ये स्थल भारत की सभ्यतागत विरासत, राष्ट्रीय गौरव और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।
- शिक्षा प्रणाली का वि-औपनिवेशीकरण: मेकालेकालीन शिक्षा व्यवस्था के प्रभाव को कम करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए पाठ्यक्रम में प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणालियों, शास्त्रीय विज्ञान, प्रामाणिक इतिहास और स्वदेशी नायकों की गाथाओं को शामिल किया जा रहा है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का नया सामरिक सिद्धांत यह सिद्ध करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है।
- यह भू-आर्थिक नवाचार (रुपया व्यापार), सशक्त सैन्य अधोसंरचना, ‘प्रहार’ नीति के तहत सख्त आंतरिक सुरक्षा और सभ्यतागत चेतना का एक एकीकृत संगम है।
- भारत अपनी आर्थिक दक्षता, कानूनी कठोरता और दूरदर्शी नीतियों के बल पर आज वैश्विक मंच पर एक स्वायत्त और प्रमुख एजेंडा-सेटर के रूप में स्थापित हो चुका है।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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