सारांश:
- यह आलेख पूर्व आरबीआई गवर्नर वाई.वी. रेड्डी की पुस्तक “ADVISE AND DISSENT” के हवाले से भारत के आर्थिक इतिहास, बैंकिंग घोटालों, और यूपीए शासनकाल के कुप्रबंधन का विश्लेषण करता है।
- यह कांग्रेस पार्टी की तुष्टिकरण की राजनीति, बहुसंख्यक समाज की उपेक्षा, और ऐतिहासिक आर्थिक संकटों की समीक्षा करते हुए वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के ‘फ्रेजाइल-फाइव’ से दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्था बनने की परिवर्तनकारी यात्रा को रेखांकित करता है।
- साथ ही, यह उन निरंतर प्रयासों से भी अवगत कराता है जो आज भी राष्ट्र विरोधी ताकतों और विपक्षी गठजोड़ द्वारा देश में अस्थिरता पैदा करने के लिए किए जा रहे हैं।
अतीत के अंधकार से विश्वगुरु बनने तक का सफर।
प्रस्तावना और बैंकिंग घोटालों का सच
पूर्व आरबीआई गवर्नर वाई.वी. रेड्डी की पुस्तक “ADVISE AND DISSENT” में भारतीय अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। इसी संदर्भ में, बैंकों को चूना लगाकर देश छोड़कर भागने वाले आर्थिक अपराधियों और भगोड़ों की लंबी सूची इस बात का प्रमाण है कि पिछली सरकारों के दौरान वित्तीय अनुशासन किस स्तर तक गिर चुका था।
- भगोड़ों और डिफॉल्टर्स की सूची: विजय माल्या, मेहुल चोक्सी, नीरव मोदी, ललित मोदी और उनके सहयोगियों जैसे दर्जनों नाम इस बात की गवाही देते हैं कि कैसे यूपीए शासनकाल के दौरान बिना उचित जांच-परख के बड़े पैमाने पर ऋण बांटे गए।
- संगठन और विचारधारा की स्थिति: इनमें से एक भी व्यक्ति किसी राष्ट्रवादी संगठन, आरएसएस, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद या भाजपा से संबंधित नहीं था, बल्कि यह सब तत्कालीन राजनीतिक संरक्षण और लचर व्यवस्था का परिणाम था।
- ऋण वितरण का कालखंड: सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन सभी डिफाल्टरों ने अपने अधिकांश या कुल ऋण 1 मई 2014 से पहले यानी कांग्रेस और यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान ही प्राप्त किए थे।
ऐतिहासिक आर्थिक संकट और 1990 के दौर की त्रासदी
कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा आज की प्रगतिशील अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि उनका अपना इतिहास देश को आर्थिक गर्त में धकेलने का रहा है।
- सोना गिरवी रखने की विवशता: राजीव गांधी और कांग्रेस सरकारों के कुप्रबंधन के परिणामस्वरूप 1990 के दशक की शुरुआत में भारत को अपना 47 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड के पास गिरवी रखना पड़ा था। देश के पास मात्र 15 दिनों का आयात करने के लिए भी विदेशी मुद्रा नहीं बची थी।
- बोफोर्स और घोटालों की संस्कृति: बोफोर्स दलाली से लेकर देश के संसाधनों की अंधाधुंध लूट ने भारतीय अर्थव्यवस्था को दिवालिया होने की कगार पर ला खड़ा किया था।
- एनरॉन (दाभोल) विवाद: अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय शुरू हुए दाभोल प्रोजेक्ट के कानूनी मामलों में यूपीए सरकार के दौरान जिस प्रकार की नीतियां अपनाई गईं और भारी-भरकम मुआवजा देना पड़ा, उसने देश के खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया।
तुष्टिकरण की राजनीति और बहुसंख्यक समाज की उपेक्षा
स्वतंत्रता के बाद से ही कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में बने रहने के लिए तुष्टिकरण और वोट बैंक की खतरनाक राजनीति का सहारा लिया।
- सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने पर आघात: कांग्रेस ने हमेशा अल्पसंख्यक तुष्टिकरण को प्राथमिकता दी, जिससे बहुसंख्यक हिंदू समाज के हितों को लगातार ठेस पहुँची।
- सांप्रदायिक हिंसा विधेयक और सच्चर कमेटी: सच्चर समिति की सिफारिशों और सांप्रदायिक हिंसा विधेयक जैसे कुत्सित प्रयासों के जरिए बहुसंख्यक समाज को देश में दोयम दर्जे का नागरिक बनाने के षड्यंत्र रचे गए, जिन्हें राष्ट्रवादी ताकतों और भाजपा के कड़े विरोध के कारण संसद में रोका जा सका।
- विदेशी और राष्ट्रविरोधी ताकतों से गठजोड़: राजनीतिक लाभ के लिए देश के आंतरिक हितों की बलि चढ़ाना और विदेशी ताकतों या गुप्त शत्रुओं के इशारे पर नीतियां बनाना कांग्रेस का पुराना चरित्र रहा है।
2014 के बाद का अभूतपूर्व कायापलट
यदि 2014 में देश की बागडोर राष्ट्रवादियों के हाथ में न आई होती, तो आज भारत की स्थिति भी पाकिस्तान और कंगाल हो चुके अन्य पड़ोसियों जैसी हो जाती।
- फ्रेजाइल-फाइव से शीर्ष अर्थव्यवस्था: वर्तमान यशस्वी नेतृत्व और केंद्र सरकार ने देश को ‘फ्रेजाइल-फाइव’ (नाजुक पांच अर्थव्यवस्थाओं) की श्रेणी से निकालकर दुनिया की शीर्ष पांच सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में ला खड़ा किया है।
- मजबूत सैन्य और वित्तीय साख: आज भारत का विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक ऊंचाई पर है, देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और वैश्विक स्तर पर भारत की साख ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में अग्रसर है।
- भ्रष्टाचार पर लगाम: मोदी सरकार के आने के बाद से बैंकिंग घोटालों और लूट की संस्कृति पर पूरी तरह लगाम लगी है।
वर्तमान षड्यंत्र और राष्ट्रविरोधी ताकतों की चालें
आज जब देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है, तब पराजित और हताश राजनीतिक दल देश को अस्थिर करने के नए हथकंडे अपना रहे हैं।
- अस्थिरता पैदा करने के प्रयास: कांग्रेस और उसका तथाकथित ठगबंधन देशविरोधी इकोसिस्टम, विदेशी डीप स्टेट और निहित स्वार्थी तत्वों के साथ मिलकर लगातार षड्यंत्र रच रहा है।
- छात्रों और समुदायों को उकसाना: यूजीसी, नीट और विभिन्न सामाजिक मुद्दों को आधार बनाकर युवाओं, छात्रों और सवर्ण तथा अन्य समुदायों को भड़काने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि देश में अराजकता फैलाई जा सके।
- सतर्कता की आवश्यकता: देश की युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि कैसे ये ताकतें अपने स्वार्थ के लिए देश को फिर से अंधकार में धकेलना चाहती हैं।
🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
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