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आंतरिक गद्दारों का खात्मा

आंतरिक गद्दारों का खात्मा: इटली की निर्णायक कार्रवाई से सबक

सारांश

  • यह विस्तृत राजनीतिक और समाजशास्त्रीय विश्लेषण राष्ट्रीय सुरक्षा के दो अनिवार्य स्तंभों—मजबूत राज्य की दृढ़ इच्छाशक्ति और जागरूक नागरिकों के सामूहिक प्रतिरोध—की पड़ताल करता है।
  • लेख में इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) द्वारा बोलोग्ना में रह रहे पाकिस्तानी इमाम जुल्फिकार खान (Zulfiqar Khan) को सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के कारण त्वरित रूप से निष्कासित किए जाने के साहसिक निर्णय का गहराई से विश्लेषण किया गया है।
  • विश्लेषण यह स्पष्ट करता है कि मेलोनी सरकार इसलिए कठोर कार्रवाई कर सकी क्योंकि वहाँ का राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र किसी आंतरिक ‘गद्दार इकोसिस्टम’ से ग्रस्त नहीं है। इसके विपरीत, भारत को दशकों से एक ऐसे pampered (लाड़-प्यार से पाले गए) आंतरिक ट्रेडर/apologist इकोसिस्टम का सामना करना पड़ रहा है जो हर राष्ट्रीय सुरक्षा के कदम पर रोड़े अटकाता है।
  • यह आलेख इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि जब तक देश के देशभक्त नागरिक इन राष्ट्रविरोधी तत्वों की पहचान कर उनका सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से पूर्ण बहिष्कार नहीं करेंगे और एक राष्ट्रनिष्ठ सरकार का पुरजोर समर्थन नहीं करेंगे, तब तक देश की आंतरिक सुरक्षा के खतरे समाप्त नहीं हो सकते। इसके लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति ही एकमात्र विकल्प

नागरिक सतर्कता की अनिवार्यता

भूमिका: संप्रभु इच्छाशक्ति बनाम आंतरिक तोड़फोड़ का विरोधाभास

  • समकालीन भू-राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून का राज किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता की पहली शर्त होते हैं। हाल ही में यूरोपीय देश इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) के प्रशासन ने एक ऐसा साहसिक और अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। इटली के अधिकारियों ने बोलोग्ना (Bologna) में लंबे समय से रह रहे पाकिस्तानी मूल के इमाम जुल्फिकार खान को देश की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा मानते हुए तत्काल प्रभाव से निष्कासित (Deport) कर दिया।
  • जुल्फिकार खान द्वारा अपनी धार्मिक सभाओं और डिजिटल माध्यमों से हमास के समर्थन में भड़काऊ भाषण देने, पश्चिमी समाज के खिलाफ जहर उगलने, और राष्ट्रविरोधी विचारों को बढ़ावा देने के पुख्ता प्रमाण मिलने पर आंतरिक मंत्री मातेओ पियानतेदोसी (Matteo Piantedosi) ने निष्कासन आदेश पर हस्ताक्षर किए।
  • यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जियोर्जिया मेलोनी इतनी त्वरित और निर्णायक कार्रवाई इसलिए कर सकीं क्योंकि उनकी राजनीतिक व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र किसी ऐसे entrenched (जड़ें जमाए बैठे) घरेलू नेटवर्क से पंगु नहीं है जो देश के भीतर रहकर दुश्मनों के हितों की पैरवी करता हो।

1. भारत की ऐतिहासिक चुनौती: दशकों से पाला गया ‘गद्दार इकोसिस्टम’

इटली और यूरोप के अन्य सुदृढ़ राष्ट्रों के विपरीत, भारत को स्वतंत्रता के बाद से ही एक अत्यंत जटिल, गहरे और संगठित आंतरिक संकट का सामना करना पड़ा है।

  • अपराधियों और उपद्रवियों का संरक्षण: भारत के भीतर एक ऐसा वर्ग हमेशा सक्रिय रहा है जो वोट-बैंक की राजनीति और तुष्टीकरण के बल पर राष्ट्रविरोधी तत्वों, घुसपैठियों और कट्टरपंथियों को राजनीतिक और कानूनी ढाल प्रदान करता रहा है।
  • सक्रिय प्रॉक्सी नेटवर्क: जब भी भारतीय राज्य तंत्र किसी राष्ट्रविरोधी मॉड्यूल, अर्बन नक्सल नेटवर्क या अवैध घुसपैठिए के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करता है, तो यह घरेलू इकोसिस्टम सक्रिय हो जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय दुष्प्रचार: मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर यह लॉबी देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत सरकार की कार्रवाइयों के खिलाफ २४ घंटे नकारात्मक नैरेटिव गढ़ने का काम करती है, ताकि सुरक्षा एजेंसियों के हाथ बांधे जा सकें।

2. समाधान का मार्ग: नागरिक चेतना और चौतरफा बहिष्कार

  • केवल सरकारी नीतियों, पुलिस बल या कड़े कानूनों के सहारे इस आंतरिक दीमक को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज को स्वयं आगे आना होगा। जब तक आम नागरिक और राष्ट्रभक्त समाज जागृत होकर इन आंतरिक गद्दारों की पहचान नहीं करेगा, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।
  • जब तक देशभक्त नागरिक इन गद्दारों को पहचानकर उनका सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से पूर्ण बहिष्कार नहीं करेंगे, और एक राष्ट्रनिष्ठ सरकार का राजनीतिक व सामाजिक रूप से मजबूत समर्थन नहीं करेंगे, तब तक ये समस्याएं खत्म होने वाली नहीं हैं।

इस संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए नागरिकों को निम्नलिखित चार आयामों पर सख्ती से काम करना होगा:

  • सामाजिक अलगाव (Social Boycott): जो व्यक्ति या संगठन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से देश की सेना, संविधान या संप्रभुता का अपमान करते हैं, उन्हें समाज में किसी भी प्रकार की प्रतिष्ठा या मंच नहीं मिलना चाहिए।
  • सांस्कृतिक और वैचारिक प्रतिवाद (Cultural Defense): राष्ट्रविरोधी साहित्य, सिनेमा, और डिजिटल प्रोपेगेंडा का खुलकर बहिष्कार किया जाए तथा अपनी गौरवशाली संस्कृति और राष्ट्र-प्रथम (India First) के भाव को प्रबल किया जाए।
  • राजनीतिक स्थिरता और समर्थन (Political Cohesion): राष्ट्रहित में कड़े निर्णय लेने वाली राष्ट्रनिष्ठ सरकारों को जनता का अटूट समर्थन मिलना चाहिए ताकि तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले दल हाशिए पर चले जाएं।
  • आर्थिक नाकेबंदी (Economic Disincentivization): उन व्यावसायिक घरानों, मीडिया संस्थानों और संस्थाओं का आर्थिक बहिष्कार किया जाए जो देश की जड़ों को खोखला करने वाले एजेंडों को फंड या समर्थन देते हैं।

3. जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की अनिवार्यता

इतिहास गवाह है कि राष्ट्रों का पतन बाहरी शत्रुओं से अधिक आंतरिक गद्दारों और कायरतापूर्ण समझौतों के कारण हुआ है। अब समय आ गया है कि देश के नागरिक और व्यवस्था दोनों मिलकर एक स्पष्ट नीति अपनाएँ।

  • जीरो टॉलरेंस की नीति: राष्ट्र की सुरक्षा, सीमा की रक्षा और सांस्कृतिक अखंडता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता या अनुकंपा स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
  • सख्त जवाबदेही: जो लोग देश के भीतर रहकर देश के खिलाफ ही षड्यंत्र रचते हैं, उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कवच नहीं मिलना चाहिए। उन्हें हर हाल में कानून के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष: निर्णायक नेतृत्व और एकजुट समाज से ही बनेगा ‘विकसित भारत’

  • इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व में इच्छाशक्ति हो, तो देशहित सर्वोपरि रखा जा सकता है। भारत आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुदृढ़ नेतृत्व में ‘विकसित भारत @२०४७’ के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है।
  • लेकिन इस महान राष्ट्र को एक अजेय वैश्विक महाशक्ति (Global Superpower) बनाने के लिए यह आवश्यक है कि हम अपनी आंतरिक व्यवस्था को भी पूरी तरह शुद्ध करें। जब तक सरकार अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देती रहेगी और देश का जागरूक नागरिक इन आंतरिक गद्दारों का सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बहिष्कार करते हुए राष्ट्रनिष्ठ सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़ा रहेगा, तब तक कोई भी ताकत भारत की प्रगति को नहीं रोक सकती। यही राष्ट्रधर्म है और यही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

🇮🇳जय भारत, वन्देमातरम 🇮

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