Skip to content Skip to sidebar Skip to footer
तुष्टिकरण की राजनीति

तुष्टिकरण की राजनीति बनाम राष्ट्र निर्माण

सारांश

  • यह आलेख तमिलनाडु में टीवीके (TVK) के नेता जोसफ विजय की हालिया नीतिगत घोषणाओं तथा अन्य विपक्षी/ठगबंधन शासित राज्यों की प्रशासनिक नीतियों का एक गहन राजनीतिक व आर्थिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
  • लेख में यह रेखांकित किया गया है कि किस प्रकार सत्ता में बने रहने के लिए अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम एवं क्रिश्चियन) को लक्षित करके ‘फ्रीबीज’ (मुफ्त सौगातें) और बजटीय आवंटन बांटे जा रहे हैं।
  • इस तरह की धर्म-आधारित कल्याणकारी योजनाओं के कारण राज्य के खजाने पर अत्यधिक वित्तीय बोझ पड़ रहा है, जिससे बुनियादी ढांचे (Infrastructure), औद्योगिक विकास और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के लिए बजट पूरी तरह समाप्त हो रहा है।
  • लेख में 2014 से पूर्व के ‘Fragile Five’ के दौर की तुलना वर्तमान स्थिति से करते हुए, यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि देश को ‘विश्वगुरु’ और वैश्विक महाशक्ति बनाने के लिए तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर राष्ट्रवादी एनडीए (NDA) के विकास मॉडल को समर्थन देना क्यों आवश्यक है।

विपक्षी शासित राज्यों का नीतिगत विश्लेषण

1. तमिलनाडु में जोसफ विजय सरकार के विवादित फैसले और घोषणाएं

तमिलनाडु की राजनीति में हालिया घटनाक्रमों ने राज्य की नीतियों के झुकाव को स्पष्ट कर दिया है। जोसफ विजय के नेतृत्व में सामने आई घोषणाएं यह दर्शाती हैं कि राज्य का ध्यान सर्वांगीण विकास के बजाय विशेष वर्ग के तुष्टिकरण पर केंद्रित हो रहा है।

  • हज सब्सिडी में अप्रत्याशित वृद्धि: पहली बार हज यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सरकारी वित्तीय सहायता राशि को ₹25,000 से बढ़ाकर ₹35,000 कर दिया गया है।
  • मुस्लिम छात्राओं के लिए पूर्ण शुल्क माफी: सरकारी कोटे (UG) के तहत अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाली मुस्लिम छात्राओं की संपूर्ण कॉलेज फीस का भुगतान राज्य सरकार करेगी।
  • सामुदायिक संपत्तियों के लिए ब्याज-मुक्त ऋण: केवल मुस्लिम और क्रिश्चियन समुदायों की सार्वजनिक और सामुदायिक संपत्तियों के रख-रखाव के लिए राज्य के खजाने से ‘ब्याज-मुक्त ऋण’ (Interest-Free Loan) प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है।
  • नये ‘डिस्ट्रिक्ट माइनॉरिटी ऑफिसर्स‘ का सृजन: राज्य के 10 नए जिलों में विशेष रूप से ‘माइनॉरिटी ऑफिसर्स’ के नए सरकारी पद सृजित किए जा रहे हैं ताकि केवल एक वर्ग की योजनाओं की निगरानी हो सके।
  • धार्मिक ढांचों के लिए भारी बजटीय आवंटन:
    • प्राचीन व ऐतिहासिक चर्चों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए सीधे ₹10 करोड़ का अनुदान आवंटित किया गया है।
    • तमिलनाडु वक्फ बोर्ड की नई, आधुनिक और सर्व-सुविधायुक्त इमारत के निर्माण के लिए ₹40 करोड़ की भारी राशि तय की गई है।
  • छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार: कक्षा 1 से 8 तक मिलने वाली मुस्लिम छात्राओं की स्कॉलरशिप को विस्तारित करके 9वीं और 10वीं कक्षा तक लागू किया गया है तथा वोकेशनल स्किल ट्रेनिंग के लिए भी आर्थिक मदद दी जा रही है।

2. सत्तर सालों की वही पुरानी तुष्टिकरण नीति का पुनरावर्तन

यह केवल एक राज्य तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि यह विपक्षी और ‘ठगबंधन’ दलों की पुरानी कार्यशैली का हिस्सा है।

  • वोट-बैंक की संकीर्ण राजनीति: पिछले सात दशकों से सत्ता में बने रहने के लिए मुस्लिम और क्रिश्चियन अल्पसंख्यकों को विशेष छूट और मुफ्त सौगातें दी जाती रही हैं ताकि एकमुश्त वोट-बैंक हासिल किया जा सके।
  • असली अल्पसंख्यकों की अनदेखी: इस वोट-बैंक की राजनीति के चक्कर में जैन, सिख, बौद्ध और अन्य छोटे अल्पसंख्यक समुदायों को पूरी तरह किनारे कर दिया गया है, क्योंकि उनका संगठित राजनीतिक वोट-बैंक नहीं है।
  • बहुसंख्यक आबादी के साथ पक्षपात: सर्वसमावेशी विकास के बजाय जब नीतियां केवल धार्मिक पहचान के आधार पर बनने लगती हैं, तो बहुसंख्यक और अन्य जरूरतमंद वर्ग स्वयं को उपेक्षित महसूस करते हैं।

3. खजाने की खाली स्थिति: राज्यों का गहराता वित्तीय संकट

‘फ्रीबीज’ और तुष्टिकरण की योजनाओं ने विपक्षी शासित राज्यों की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है। राज्य के संसाधनों का दुरुपयोग इस सीमा तक पहुंच गया है कि वित्तीय आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।

  • वेतन और बिल भुगतान का संकट: राज्यों के खजाने इतने खाली हो चुके हैं कि सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन देने और खजाने के दैनिक दायित्वों (Treasury Bills) का भुगतान करने में भी कठिनाई आ रही है।
  • विकास कार्यों पर ब्रेक: जब राजस्व का बड़ा हिस्सा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और लक्षित सब्सिडी में चला जाता है, तो सड़कों, पुलों, अस्पतालों और बिजली परियोजनाओं के निर्माण के लिए बजट शून्य हो जाता है।
  • कर्ज के जाल में फंसते राज्य: बुनियादी विकास के बजाय केवल राजनीतिक लाभ के लिए लिए गए भारी भरकम कर्ज के कारण राज्यों का कर्ज-जीडीपी अनुपात (Debt-to-GDP Ratio) खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।

4. 2014 से पहले का दौर बनाम वर्तमान का मजबूत भारत

वर्तमान स्थितियां 2014 से पहले के उस अंधकारमय दौर की याद दिलाती हैं जब भारत को दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं (‘Fragile Five’) में गिना जाता था।

  • परिवारवाद और भ्रष्टाचार का युग: 2014 से पूर्व, वंशवादी नेता (Dynasts) और सत्ताधारी तंत्र समृद्ध होते रहे, जबकि देश का खजाना खाली होता गया और आम जनता आर्थिक तंगी झेलती रही।
  • एनडीए का अवसंरचना-केंद्रित मॉडल: 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने नीतिगत पंगुता को छोड़कर ठोस आर्थिक सुधारों, विश्वस्तरीय हाईवे नेटवर्क, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मार्ग चुना।
  • ‘फ्रीबीज‘ मॉडल बनाम पूंजी निर्माण (Capital Formation): एक तरफ खजाना लुटाकर अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने वाला मॉडल है, तो दूसरी तरफ दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण और रोजगार सृजन करने वाला राष्ट्रवादी मॉडल है।

5. राष्ट्र के नाम संदेश

यदि भारत को 2014 से पहले की पतनशील स्थिति में जाने से बचाना है और इसे एक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो राजनीतिक परिपक्वता दिखानी होगी।

  • तुष्टिकरण को जड़ से उखाड़ना: राज्यों के संसाधनों को निचोड़ने वाली और समाज को बांटने वाली ‘ठगबंधन’ की राजनीति को चुनावी रूप से नकारना होगा।
  • राष्ट्रवादी नीतियों का समर्थन: देश की सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता, और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राष्ट्रवादी एनडीए (NDA) के विजन के साथ खड़ा होना समय की मांग है।
  • ‘विश्वगुरु‘ का संकल्प: भारत तभी वैश्विक महाशक्ति और ‘विश्वगुरु’ के पद पर आसीन हो सकता है जब राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर केवल राष्ट्रहित और निष्पक्ष विकास को प्राथमिकता दें।

🇮🇳 जय भारत, वन्देमातरम 🇮🇳

Read our previous blogs 👉 Click here

Join us on Arattai 👉 Click here

👉Join Our Channels👈

Share Post

Leave a comment

from the blog

Latest Posts and Articles

We have undertaken a focused initiative to raise awareness among Hindus regarding the challenges currently confronting us as a community, our Hindu religion, and our Hindu nation, and to deeply understand the potential consequences of these issues. Through this awareness, Hindus will come to realize the underlying causes of these problems, identify the factors and entities contributing to them, and explore the solutions available. Equally essential, they will learn the critical role they can play in actively addressing these challenges

SaveIndia © 2026. All Rights Reserved.