सारांश:
- यह विस्तृत समीक्षा वैश्विक मंच पर भारत के अभ्युदय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘विश्वबंधु’ कूटनीति की सफलता, तथा भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने के लिए सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर आवश्यक जन-जागरूकता का व्यापक खाका प्रस्तुत करती है।
- इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा महात्मा गांधी की जयंती पर की गई पीएम मोदी के शांति प्रयासों की सराहना, युद्ध क्षेत्रों में संचालित ऐतिहासिक बचाव अभियानों (जैसे ऑपरेशन गंगा, कावेरी, देवी शक्ति), तथा अंतर्राष्ट्रीय आपदाओं (जैसे ऑपरेशन दोस्त, मैत्री, और वैक्सीन मैत्री) में भारत के अग्रणी योगदान का तथ्यात्मक उल्लेख है।
- इसके साथ ही, यह दस्तावेज 2014 से पूर्व की राजनीतिक अपंगता (‘फ्रैजाइल फाइव’) और तुष्टिकरण की नीतियों से हटकर भारत को एक मजबूत, सुरक्षित, समृद्ध और स्वाभिमानी राष्ट्र बनाने के राष्ट्रवादियों के दायित्व को रेखांकित करता है।
मोदी कूटनीति, राष्ट्रीय स्थिरता और जन-सहानुभूति का संकल्प
1. महात्मा गांधी की जयंती और पुतिन का वैश्विक शांति संदेश
विश्व शांति के लिए भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों को जब शीर्ष वैश्विक नेताओं द्वारा स्वीकार किया जाता है, तो यह संपूर्ण देश के लिए स्वाभिमान का क्षण बन जाता है:
- गांधी जयंती का पावन अवसर:
- अहिंसा और आधुनिक कूटनीति: महात्मा गांधी जी की जयंती पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा पीएम मोदी के शांति विचारों (“Good Ideas for Ukraine Peace”) की सार्वजनिक सराहना यह दर्शाती है कि भारत का अहिंसा का संदेश आज के युद्ध-ग्रस्त समय में सबसे प्रासंगिक समाधान है।
- विश्वसनीय मध्यस्थ: भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा प्रमुख देश बनकर उभरा है जो रूस, यूक्रेन, अमेरिका और पश्चिमी शक्तियों के साथ निष्पक्ष और परिणाम-उन्मुख वार्ता करने में सक्षम है।
- ‘विश्वबंधु‘ के रूप में वैश्विक स्वीकार्यता:
- निर्णायक नेतृत्व: गृह मंत्री अमित शाह के कथनानुसार, आज दुनिया जब किसी भी जटिल संकट से गुजरती है, तो भारत का मंतव्य सर्वोच्च प्राथमिकता से सुना जाता है।
2. “यह युद्ध का युग नहीं है”: भू-राजनीतिक संघर्षों में भारत की कूटनीतिक जीत
प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने केवल मूकदर्शक बनने के बजाय अंतरराष्ट्रीय शांति प्रक्रिया को आकार दिया है:
- रूस-यूक्रेन संघर्ष और बैक-चैनल कूटनीति:
- शांति का सार्वभौमिक संदेश: समरकंद में पीएम मोदी का वाक्य—“आज का युग युद्ध का युग नहीं है”—G20 और UN के शांति प्रस्तावों की आत्मा बना।
- मानवीय संकट का निवारण: ज़ापोरिज़िया परमाणु संयंत्र की सुरक्षा हो या वैश्विक खाद्य व ईंधन आपूर्ति श्रृंखला, भारत की बैक-चैनल कूटनीति ने वैश्विक तबाही को टालने में मदद की।
- मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) संकट पर स्पष्ट दृष्टिकोण:
- संतुलित और दृढ़ नीति: भारत ने आतंकवाद के प्रति ज़ीरो-टॉलरेंस की नीति को दोहराते हुए ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ का समर्थन किया और गज़ा सहित प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत सामग्री भेजी।
3. युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं में अभूतपूर्व राहत व बचाव अभियान (Evacuation & HADR Diplomacy)
‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के प्राचीन दर्शन को धरातल पर उतारते हुए भारत आज दुनिया भर में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ (First Responder) बन चुका है:
- रणनीतिक युद्ध क्षेत्रों से सफल निकासी:
- ऑपरेशन गंगा (2022): यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र से 22,000 से अधिक भारतीय छात्रों और मित्र देशों के नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया।
- ऑपरेशन कावेरी (2023) व देवी शक्ति (2021): सूडान के गृहयुद्ध से 3,900+ नागरिकों की सुरक्षित वापसी और तालिबान-शासित काबुल से भारतीयों व पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब जी का सम्मानपूर्वक रेस्क्यू।
- वैश्विक आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य कूटनीति:
- ऑपरेशन दोस्त (2023) व मैत्री: तुर्की-सीरिया भूकंप के कुछ ही घंटों में NDRF और आर्मी फील्ड अस्पताल की तैनाती, तथा नेपाल में सबसे तेज सहायता।
वैक्सीन मैत्री (COVID-19): जब पश्चिमी देश टीकों की जमाखोरी कर रहे थे, तब भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ के 100 से अधिक देशों को 300 मिलियन (30 करोड़) से अधिक वैक्सीन खुराकें उपलब्ध कराईं।
4. 2014 से पूर्व का कालखंड बनाम वर्तमान का सशक्त भारत
भारत को ‘विश्वगुरु’ बनने से रोकने वाली अतीत की विसंगतियों और वर्तमान परिवर्तनों का तुलनात्मक मूल्यांकन आवश्यक है:
- 2014 से पूर्व का दौर (कांग्रेस व ‘ठगबंधन‘ का काल):
- आर्थिक व नीतिगत अपंगता: वर्ष 2014 से पूर्व भारत दुनिया की सबसे कमजोर 5 अर्थव्यवस्थाओं (‘Fragile Five’) की सूची में था।
- भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण: अनगिनत घोटालों, दिशाहीन विदेश नीति, तुष्टिकरण की राजनीति और बहुसंख्यक समाज की उपेक्षा ने देश के विकास को बाधित किया था।
- आंतरिक सुरक्षा में ढील: आतंकवाद और असामाजिक तत्वों के प्रति नरमी के कारण देश सुरक्षा की दृष्टि से बेहद नाजुक स्थिति में था।
- 2014 के पश्चात ‘मोदी युग‘ में परिवर्तन:
- विश्व की 5वीं (और जल्द ही 3री) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था: डिजिटल क्रांति, इंफ्रास्ट्रक्चर का अभूतपूर्व विकास और आत्मनिर्भर भारत अभियान।
- कड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा: सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और सीमा सुरक्षा के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति।
5. भारत को ‘विश्वगुरु’ और महाशक्ति बनाने में देशभक्तों का कर्तव्य एवं राष्ट्रीय सतर्कता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत तेजी से एक वैश्विक महाशक्ति और ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में अग्रसर है। इस संकल्प को साकार करने के लिए राष्ट्रवादियों का संगठित रहना अनिवार्य है:
- सामाजिक व राजनीतिक समर्थन का नैतिक दायित्व:
- राष्ट्र प्रथम (Nation First) का भाव: देश को विकास के पथ पर अनवरत बनाए रखने के लिए हर देशभक्त नागरिक का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह मोदी सरकार की नीतियों का सामाजिक, वैचारिक और राजनीतिक स्तर पर डटकर समर्थन करे।
- राष्ट्र-विरोधी तंत्र (Anti-National Ecosystem) से सतर्कता:
- निर्मित विरोधों (Manufactured Protests) का पर्दाफाश: पिछले कुछ वर्षों से फर्जी नैरेटिव्स, विदेशी फंडिंग और प्रायोजित विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से देश को अस्थिर करने का जो चक्रव्यूह रचा जा रहा है, उसके प्रति कड़ा जन-प्रतिरोध आवश्यक है।
- विघटनकारी ताकतों को नाकाम करना: देशभक्त समुदाय की एकजुटता के कारण ये राष्ट्र-विरोधी प्रयास बार-बार विफल हुए हैं, लेकिन इस समर्थन को और अधिक मुखर व सशक्त बनाने की आवश्यकता है।
- अतीत की भूलों से सीख:
- नाकाम राष्ट्र (Failed State) बनने के खतरे से बचाव: यदि राजनीतिक अस्थिरता या ‘ठगबंधन’ जैसी अवसरवादी ताकतों के हाथों में कमान आती है, तो भारत का विकास पथ पटरी से उतर सकता है और देश पुनः 2014 से पूर्व की जर्जर स्थिति या पड़ोसी विफल राष्ट्रों (जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश) जैसी अस्थिरता की ओर धकेला जा सकता है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और वैश्विक स्वीकार्यता ने भारत को एक ऐसे मुकाम पर खड़ा कर दिया है, जहां से ‘विश्वगुरु’ का सपना दूर नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पुतिन जैसे वैश्विक नेताओं द्वारा भारत के प्रयासों की सराहना और संकट के समय में भारत द्वारा निभाई गई ‘विश्वबंधु’ की भूमिका इस बात का प्रमाण है कि 21वीं सदी भारत की सदी है। देश विरोधी ताकतों और दुष्प्रचार के तंत्र को शिकस्त देते हुए, हर देशभक्त नागरिक का यह संकल्प होना चाहिए कि वह भारत की अखंडता, सुरक्षा और विकास यात्रा में पूरी मजबूती के साथ खड़ा रहे।
🇮🇳 भारत, वन्देमातरम 🇮🇳
Read our previous blogs 👉 Click here
Join us on Arattai 👉 Click here
👉Join Our Channels👈
